World Pharmacist Day 2025: क्यों मनाया जाता है विश्व फार्मासिस्ट दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व एवं भारत में फार्मासिस्ट दिवस का औचित्य!

    प्रत्येक वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस 25 सितंबर को मनाया जाता है. यह दिवस अंतर्राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) की स्थापना (25 सितंबर) की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता हैइसे 2009 में FIP की परिषद ने तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित विश्व फार्मेसी एवं औषधि विज्ञान कांग्रेस में अपनाया था.इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित और प्रभावी दवा के उपयोग को सुनिश्चित करनेस्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को उन्नत बनाने और जन स्वास्थ्य पहलुओं का समर्थन करने में फार्मेसी पेशेवरों की उभरती भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर आइये जानते हैंइसके महत्वइतिहास एवं भारत में फार्मासिस्ट की भूमिका एवं अहमियत आदि के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें... क्यों मनाया जाता है विश्व फार्मासिस्ट दिवस?विश्व फार्मासिस्ट दिवस को कुछ बिंदुओं से समझा जा सकता है यह भी पढ़ें : Holidays in October 2025: अक्टूबर माह पर्यटकों के लिए सुनहरा साबित होने वाला है! जानें इस माह इतने दिन बैंक बंद होंगे, ‘लॉन्ग वीकेंड’ का ‘बोनस’ अलग से मिल रहा है!

यह दिवस फार्मासिस्टों के बहुमूल्य और सराहनीय कार्यों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता हैजो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को सशक्त बनाने में मदद करते हैं.

विश्व फार्मासिस्ट दिवस मरीजों को दवाओंउनके सही खुराक और संभावित दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करके दवाओं के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देता है.

यह दिवस वैश्विक स्वास्थ्य में फार्मासिस्टों की केंद्रीय भूमिका की वकालत करता है और स्वास्थ्य सुधार में उनकी भूमिका को नई दशा एवं दिशा प्रदान करता है.

फार्मासिस्ट यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि सभी लोगों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाएं मिलेंजिससे स्वस्थ समुदायों का निर्माण होता है.

फार्मासिस्ट नई दवाओं के अनुसंधान में योगदान करते हैंजो भविष्य में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की मदद करती हैं.

विश्व फार्मासिस्ट दिवस का इतिहास

एफआईपी की परिषद ने साल 2009 में विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाने की घोषणा कीताकि फार्मेसी के क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जा सके और स्वास्थ्य सुधार में फार्मासिस्ट के योगदान को मान्यता मिल सके. 25 तारीख का चुनाव इसलिए किया गया थाक्योंकि साल 1912 में इसी दिन फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) की स्थापना हुई थी. इस दिवस को साल  2009 में एफआईपी की परिषद ने तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित विश्व फार्मेसी एवं औषधि विज्ञान कांग्रेस में अपनाया था. इस दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य सुधार और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने में फार्मासिस्टों की भूमिका को पहचानना और दुनिया भर में इस क्षेत्र को बढ़ावा देना है.

भारत में फार्मासिस्ट का औचित्य

भारत में स्व-औषधि सेवन और नकली दवाओं की समस्या आम है. भारतीय जनता को फार्मासिस्ट की भूमिका और विशेषज्ञता के बारे में अभी भी बहुत कम जानकारी है. यह दिवस लोगों को शिक्षित करने का अवसर देता है कि फार्मासिस्ट केवल दुकानदार नहींबल्कि योग्य और प्रशिक्षित प्रोफेशनल होते हैं. भारत में कई बार फार्मासिस्ट्स को उनकी मेहनत और ज्ञान के अनुरूप सम्मान और कीमत नहीं मिलती. फार्मेसिस्ट्स रोगियों को सही परामर्श देकर इन समस्याओं को कम कर सकते हैं. यह दिन उनके पेशे की गरिमा को बढ़ावा देता है और युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है.