World Braille Day 2022: 'विश्व ब्रेल दिवस' 2022! कौन था लुई ब्रेल? जो दृष्टिहीन होकर भी नेत्रहीनों का मसीहा बना? जानें कैसे रचा गया ब्रेल-लिपी का इतिहास?
ब्रेल-लिपि का आविष्कार करने वाले लुई ब्रेल के जन्म दिन 4 जनवरी को विशेष बनाने के लिए फ्रांस सरकार ने इस दिन को 'विश्व ब्रेल दिवस', के रूप में मनाने की घोषणा की. फ्रांसीसी शिक्षक और आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी, 1809 को हुआ था.
ब्रेल-लिपि का आविष्कार करने वाले लुई ब्रेल के जन्म दिन 4 जनवरी को विशेष बनाने के लिए फ्रांस सरकार ने इस दिन को 'विश्व ब्रेल दिवस', के रूप में मनाने की घोषणा की. फ्रांसीसी शिक्षक और आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी, 1809 को हुआ था. ब्रेल के जन्म दिन के दिन 4 जनवरी को ही फ्रांस सरकार ने दुनिया भर में 'विश्व ब्रेल दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की. स्वयं नेत्रहीन होकर भी ब्रेल ने छोटी उम्र में नेत्रहीनों के लिए ऐसा कार्य कर दिखाया, जिसकी वजह से वे आज शिक्षित हैं और समाज की मुख्य धारा से जुड़कर आम लोगों की तरह देश सेवा में संलग्न हैं. आइये जानें कौन हैं ब्रेल लिपि और किस तरह से उन्होंने यह इतिहास रचा.
कौन है लुई ब्रेल?
लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 में फ्रांस के एक छोटे से नगर कुप्रे के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोड़ों के लिए काठी बनाने का व्यवसाय करते थे. आर्थिक रूप से साधन-सम्पन्न नहीं होने के कारण वे ज्यादा-से ज्यादा काम करने लगे. लुई जब तीन साल का हुआ, तो पिता ने उसे अपने काम धंधे से जोड़ लिया. नन्हा लुई भी पूरे उत्साह से पिता की मदद करने लगा.
इस तरह लुई नेखोई आंखों की रोशनी!
एक दिन काम करते हुए एक लोहे का औजार उसकी आंखों में लग गया, जिससे आंखों से खून बहने लगा. घर वालों ने मामूली चोट समझकर आंखों पर पट्टी बांध दिया. लेकिन घाव भीतर ही भीतर बढ़ने से आठ साल की उम्र तक आते-आते वह आंखों की रोशनी खो चुका था. लेकिन लुई हताश नहीं था, वह पिता की हर कीमत पर मदद करना चाहता था. उसकी द्दढ़ इच्छा शक्ति को देखते हुए एक पादरी ने उसे पेरिस के एक अंध विद्यालय में प्रवेश दिलवा दिया. यह भी पढ़ें : Horror Dreams Real Meanings: हॉरर सपनों की क्या है हकीकत? जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र?
शिक्षा के साथ एक इतिहास रचने के लिए प्रयासरत थे ब्रेल!
नेत्रहीन विद्यालय में शिक्षक बनने के बाद लुई सच्ची निष्ठा एवं अथक परिश्रम से बहुत जल्दी सभी का चहेता बन गया. लुई यहां केवल शिक्षण कार्य नहीं कर रहे थे, बल्कि वह नेत्रहीनों के लिए कुछ क्रांति लाने की दिशा में भी अग्रसर थे. अंततः साल 1825 में लुई की मेहनत ने नेत्रहीनों के बीच क्रांति ला दी. उन्होंने ब्रेल लिपी की रचना कर एक इतिहास रच दिया.
ऐसे हुआ लुई का सपना साकार!
बात साल 1825 की है. ब्रेल 16 साल का था. उसकी मुलाकात फ्रांसिसी सेना के कैप्टन चार्ल्स बार्बियर से हुई. लुई की कोशिशों को देखते हुए चार्ल्स ने सैनिकों द्वारा अंधेरे में पढ़ी जानेवाली नाइट राइटिंग और सोनोग्राफी के बारे में उसे बताया. कोड वर्ड में लिखी यह लिपि उभरी हुई 12 बिंदुओं पर आधारित थी. उभरे कोड वर्ड्स का आयडिया लुई को रास आया. उसने उभरे कोड में थोड़ा संशोधित कर 6 प्वाइंट्स में तब्दील कर ब्रेल-लिपी तैयार कर लिया. उसने इन प्वाइंट्स को अक्षरों एवं अंकों के रूप में लोगों को दर्शाया. कहते हैं कि फ्रांस सरकार ने ब्रेल की लिपि को मान्यता देते हुए उसकी इस खोज को ब्रेल-लिपि का नाम दिया.
इतिहास रचनेवाले लुई के जीवन-खाते में थे बस 43 साल!
साल 1851 में ब्रेल टीबी से ग्रस्त हो गये. उनकी तबियत निरंतर बिगड़ती रही. 6 जनवरी 1852 को मात्र 43 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन के 16 वर्ष बाद 1868 में रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ ने इस लिपि को मान्यता दी.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 04, 2022 09:18 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

