सूर्योपासना से ऐसे चमकाएं अपनी किस्मत, हो जाएगा सभी समस्याओं का समाधान
पूजन करती महिलाएं (Photo Credits: Facebook)

संपूर्ण विश्व ने सूर्य को सदृश-देव माना है, यानी ऐसा देव जिसे आप आंखों से देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं. सूर्य की रोशनी प्रकृति के लिए जिस तरह जीवनदायिनी साबित होती है, उसे देखते हुए सूर्य देव को प्रथम दृष्टया ईश्वर मानने से इंकार नहीं किया जा सकता. पौराणिक ग्रंथों में भी सूर्य की महिमा का वर्णन मिलता है. रविवार को सूर्य का दिन माना जाता है और इस दिन सूर्य की उपासना का विशेष महत्व होता है. आइये जानें ज्ञान-विज्ञान और आध्यात्म में सूर्य देव का क्या महत्व है और सूर्य को प्रसन्न करने के लिए क्या-क्या करना श्रेयस्कर होगा.

वैज्ञानिक भी सूर्योपासना को श्रेष्ठ मानते हैं-

ग्रहों में भी सूर्य देव सबसे तेजस्वी और कांतिमय होते हैं. सूर्योपासना से ना केवल दैहिक सौंदर्य निखरता है, बल्कि ह्रदय रोग, श्वास रोग और कई विटामिन्स की कमी की भी पूर्ति करता है. चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने भी सूर्य की रोशनी को तमाम बीमारियों का रामबाण माना है. मान्यता है कि आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से सूर्य भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं और आपको रोगमुक्त एवं दीर्घायु प्रदान करते हैं.

रविवार का उपवास करता है शत्रुओं का नाश-

शास्त्रों के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुण्डली में सूर्य कमजोर हो, उनके लिए रविवार का व्रत लाभकारी होता है. सूर्य देव के नाम पर रखा व्रत आत्मविश्वास में वृ्द्धि करता है. नवग्रहों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिये रविवार का व्रत किया जाता है. शास्त्रों में ग्रहों की शान्ति के लिए व्रत के साथ पूजन, दान- स्नान व मंत्र-जाप आदि का भी बहुत महत्व होता है. रविवार के उपवास में किसी भी प्रकार का नमक, तेल का सेवन नहीं करना चाहिए. रविवार का व्रत समस्त कामनाओं की सिद्धि, नेत्र रोगों में मी, कुष्ठादि व चर्म रोगों में कमी, आयु व सौभाग्य वृ्द्धि के लिये किया जाता है.

सूर्य श्लोकः समस्त समस्याओं का समाधान-

ज्योतिषियों का मानना है, कि रविवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से फारिग होकर सूर्य दर्शन के साथ इस श्लोक का जाप करने से जातक की तमाम समस्याओं का समाधान हो जाता है.

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय

मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

 

कैसे करें सूर्योपासना-

* रविवार की प्रातकाल स्नानादि के पश्चात तांबे के लोटे में जल, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें.

* प्रातःकाल सूर्य देव की धूप, दीप एवं कपूर से पूजा करें. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती, जिसकी वजह से आप तन मन से स्वस्थ रहते हैं.

* रविवार के दिन सूर्योपासना के पश्चात सूर्य की प्रिय वस्तुओं तांबे का बर्तन, पीला या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें.

कुंडली दोष दूर करता है सूर्योपासना-

अकसर कठोर परिश्रम के पश्चात भी इंसान विशेष को उसका उचित फल नहीं प्राप्त हो पाता. ज्योतिषि इसके पीछे ग्रहों की अशुभ स्थिति को जिम्मेदार मानते हैं. भविष्य पुराण के अनुसार रविवार सूर्य उपासना का विशेष दिन होता है. कुंडली में सूर्य की शुभ-अशुभ स्थिति का अच्छा या बुरा असर हमारी बुद्धि पर भी पड़ता है. सूर्यदेव को सभी ग्रहों का राजा माना गया है. आपकी कुंडनी में किसी भी प्रकार का दोष है, और आप उस दोष को मिटा कर शुभफल प्राप्त करना चाहते हैं तो रविवार की सुबह सूर्य की पहली किरण की पूजा करें.