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Sawan Pradosh Vrat 2025: क्यों खास माना जा रहा है यह श्रावण प्रदोष व्रत? जानें किन विशिष्ट कामनाओं की पूर्ति के लिए करें यह व्रत!

शिव भक्त हर माह प्रदोष व्रत रखते हैं और सच्ची आस्था एवं निष्ठा के साथ पूजा अर्चना करके पुण्य अर्जित करते हैं, लेकिन इस श्रावण मास पड़ने वाला श्रावण प्रदोष व्रत कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. यह प्रदोष व्रत 22 जुलाई 2025, मंगलवार को पड़ रहा है. इस दिन मंगलवार पड़ने से इसे भौम प्रदोष भी कहा जाता है, इस दिन भगवान शिव एवं उनके रुद्रावतार हनुमान जी की संयुक्त रूप से पूजा होती है.

Sawan Pradosh Vrat 2025: क्यों खास माना जा रहा है यह श्रावण प्रदोष व्रत? जानें किन विशिष्ट कामनाओं की पूर्ति के लिए करें यह व्रत!

    शिव भक्त हर माह प्रदोष व्रत रखते हैं और सच्ची आस्था एवं निष्ठा के साथ पूजा अर्चना करके पुण्य अर्जित करते हैं, लेकिन इस श्रावण मास पड़ने वाला श्रावण प्रदोष व्रत कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. यह प्रदोष व्रत 22 जुलाई 2025, मंगलवार को पड़ रहा है. इस दिन मंगलवार पड़ने से इसे भौम प्रदोष भी कहा जाता है, इस दिन भगवान शिव एवं उनके रुद्रावतार हनुमान जी की संयुक्त रूप से पूजा होती है. आइये जानते हैं, इस बार भौम प्रदोष क्यों बहुत खास बताया जा रहा है.

सावन भौम प्रदोष क्यों खास है?

  इस बार प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि इस दिन मंगला गौरी व्रत और द्विपुष्कर जीवन परिवर्तन की प्रार्थनाओं के साथ मनाते हैं. चाहे आप आर्थिक संकट से जूझ रहे हों या शांति की तलाश में होंयह आपके कर्म संतुलन को पुनः व्यवस्थित करने का दिन है. यह एक ऐसा शुभ दिन है, जो धनस्वास्थ्य और ऋणों से मुक्ति प्रदान करता है. पिछले पापों का नाश होता है, तथा दोषों और क्लेशों का निवारण होता है.   यह भी पढ़ें : National Mango Day 2025: कब और क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय आम दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व एवं इसकी विभिन्न किस्मों के बारे में!

भौम प्रदोष व्रत 2025 की तिथिसमय और पूजा मुहूर्त

श्रावण त्रयोदशी आरंभ: 07.05 AM (22 जुलाई 2025)

श्रावण त्रयोदशी समाप्त: 04.39 AM (23 जुलाई 2025)

पूजा मुहूर्त: शाम 07.18 PM से रात 09.22 PM तक

ब्रह्म मुहूर्त: 04.14 AM से 04.56 AM तक

उदया तिथि के अनुसार कालिक द्वादशी के उपरांत त्रयोदशी यानी 22 जुलाई 2025, मंगलवार को यह भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

विशेषः प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद शुरू होता हैऔर त्रयोदशी के साथ खत्म होता है. शिवजी की पूजा के लिए यही आदर्श समय बनता है.

विशिष्ट कामनाओं की पूर्ति हेतु प्रदोष व्रत

कुछ लोग विशिष्ट मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी भौम प्रदोष या मंगल प्रदोष की व्रत रखते हैं, और भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करते हैं. बहुत से लोग यह पूजा किसी योग्य पुरोहित से करवाना पसंद करते हैं. जानें किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है भौम प्रदोष व्रत

* दीर्घकालीन कर्ज से छुटकारा पाने के लिए

* किसी गंभीर शारीरिक बीमारी से छुटकारा पाने के लिए

* किसी भय को भगाने, खुद में साहस जगानेआंतरिक शक्ति और निडरता प्राप्त करने के लिए

* भूमि और संपत्ति संबंधी विवादों पर विजय प्राप्ति के लिए.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 20, 2025 09:02 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).