Sawan 2025: सावन का महीना आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है और माहौल भक्तिमय हो जाता है. यह महीना भगवान शिव को समर्पित है. आपने अक्सर देखा होगा कि सावन में, खासकर महिलाएं, हरे रंग के कपड़े और हरी चूड़ियां पहनना पसंद करती हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं.
सबसे पहले आपको बता दें कि सावन 2025 में 21 जुलाई, सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त, मंगलवार तक चलेगा.
धार्मिक कारण (Religious Reasons)
सावन में हरे रंग को इतना महत्व क्यों दिया जाता है, इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं:
1. भगवान शिव और प्रकृति का प्रतीक: सावन का महीना बारिश का होता है. इस समय भीषण गर्मी के बाद धरती पर पानी बरसता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है. प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है. माना जाता है कि भगवान शिव को प्रकृति से बेहद प्रेम है. क्योंकि हरा रंग प्रकृति, हरियाली, और जीवन का प्रतीक है, इसलिए शिवजी को प्रसन्न करने के लिए भक्त हरे वस्त्र धारण करते हैं.
2. सुहाग और सौभाग्य की निशानी: हिंदू धर्म में हरे रंग को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं पूजा-पाठ में अक्सर हरी चूड़ियां और हरी साड़ी पहनती हैं. मान्यता है कि सावन में माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पाया था. इसलिए, इस महीने में सुहागिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र और श्रृंगार करके माता पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं. वहीं, अविवाहित लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के लिए हरे रंग का प्रयोग करती हैं.
3. बुध ग्रह से संबंध: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है. कुंडली में बुध ग्रह को मजबूत करने से व्यक्ति के करियर, व्यापार और बुद्धि में वृद्धि होती है. सावन के महीने में हरे रंग के कपड़े पहनने से बुध ग्रह को बल मिलता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक कारण (Psychological and Scientific Reasons)
सिर्फ धार्मिक ही नहीं, हरे रंग को पहनने के पीछे कुछ वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तथ्य भी हैं:
1. आंखों को सुकून देता है: हरा रंग हमारी आंखों को सबसे ज्यादा आराम और सुकून देता है. तेज गर्मी और धूप के बाद जब मानसून में चारों तरफ हरियाली दिखती है, तो आंखों को ठंडक मिलती है. हरा रंग देखने से तनाव कम होता है और मन शांत होता है.
2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: कलर साइकोलॉजी (रंगों का मनोविज्ञान) के अनुसार, हरा रंग संतुलन, शांति, और सकारात्मकता का प्रतीक है. यह मन में जलन और गुस्से जैसे नकारात्मक भावों को कम करता है और एक नई ऊर्जा का संचार करता है. जब हम हरे रंग के कपड़े पहनते हैं, तो हम खुद को प्रकृति के करीब महसूस करते हैं, जिससे हमारा मूड अच्छा होता है.
तो अगली बार जब आप किसी को सावन में हरे रंग में देखें, तो समझ जाएं कि यह सिर्फ एक फैशन नहीं है. यह भक्ति, प्रकृति के प्रति सम्मान, सौभाग्य की कामना और मन की शांति का एक खूबसूरत संगम है. यह परंपरा हमें धर्म और प्रकृति दोनों से जोड़ती है.













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