साल 1936 स्वतंत्र राज्य का दर्जा पाने से पहले ओड़िसा बिहार और झारखंड के साथ बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था. मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास और फकीर मोहन सेनापति जैसे प्रमुख नेताओं ने 20 के दशक की शुरुआत में एक अलग राज्य की मांग उठाई थी. उनके अथक प्रयासों से ओडिशा का गठन भारत के पहले भाषाई आधार पर स्थापित राज्य के रूप में हुआ था. 1 अप्रैल 1936 को ब्रिटिश सरकार ने आधिकारिक तौर पर ओड़िशा को बिहार और उड़ीसा प्रांत से अलग करते हुए इसे स्वतंत्र प्रशासनिक दर्जा दिया. इस उल्लेखनीय उपलब्धि को हर साल ओडिशा राज्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसे उत्कल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. आइये जानते हैं इस दिवस के इतिहास एवं तमाम रोचक फैक्ट के बारे में.....
इतिहास के पन्नों में क्रमशः आगे बढ़ता ओड़िशा
आज जहां ओड़िशा प्रदेश स्थित है, प्राचीन काल में यहां कलिंग राजवंश का का शासन था, जो मौर्य आक्रमण के खिलाफ अपने प्रतिरोध के लिए जाना जाता था. 261 ईसा पूर्व में प्रसिद्ध कलिंग युद्ध ने सम्राट अशोक की गहराई से प्रभावित किया, जिससे उन्हें बौद्ध धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया. मध्यकाल में ओड़िशा पूर्वी गंगा और गजपति राजवंशों के अधीन फला-फूला. कोर्णाक सूर्य मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्मारक जो अब यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है, इस युग के दौरान बनाए गये थे, जो राज्य की स्थापत्य प्रतिभा को दर्शाते हैं. 19वीं शताब्दी की शुरुआत में ओडिशा ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और इसे विभिन्न प्रशासनिक प्रेसीडेंसी में विभाजित किया गया. 1936 में राज्य का दर्जा हासिल करने के बाद ओडिशा ने आधुनिकीकरण को अपनाते हुए अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए संस्कृति अर्थव्यवस्था और विकास में उल्लेखनीय प्रगति की. यह भी पढ़ें : Rajasthan Day 2025 Messages: राजस्थान दिवस के इन शानदार हिंदी WhatsApp Wishes, Shayaris, GIF Greetings को भेजकर अपनों को दें शुभकामनाएं
ओडिशा के बारे में रोचक और जानकारी योग्य तथ्य
संसाधनों से भरपूर ओडिशा लौह अयस्क, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, चूना पत्थर और मैंगनीज जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाता है.
मंदिरों का शहरः ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को मंदिरों का शहर कहा जाता है. प्राचीन काल में यहां जगन्नाथ पुरी, लिंगराज मंदिर, कोर्णाक मंदिर, झारियाल मंदिर, मुक्ति मंडप, ब्रह्मेश्वर जैसे 700 से अधिक मंदिर थे.
ओड़िशी नृत्य-कलाः ओडिसी नृत्य की उत्पत्ति ओडिशा के हिंदू मंदिरों से हुई, जिसे देश के सबसे प्राचीन नृत्य-कला के रूप में जाना जाता है.
जैव विविधता से समृद्ध
ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान ओडिशा का दूसरा सबसे बड़ा बायोस्फीयर रिजर्व है।
ओडिशा को उत्कल क्यों कहा जाता है?
ओड़िशा को प्राचीनकाल में उत्कल के नाम से जाना जाता था, जिसका उल्लेख महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी उल्लेखित है. 1882 में उत्कल सभा का गठन हुआ था, जिसने ओडिशा के निर्माण के लिए एक राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत की. 1 अप्रैल को उड़ीसा का स्थापना दिवस मनाया जाता है, जिसे उत्कल दिवस के नाम से जाना जाता है.













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