Smartphone Vision Syndrome: आज के डिजिटल युग में, स्मार्टफोन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार स्क्रीन देखने से आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है? स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम (Smartphone Vision Syndrome) एक ऐसी समस्या बनती जा रही है, जिससे दुनिया भर में लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं. अगर आप भी लंबे समय तक फोन स्क्रीन पर समय बिताते हैं, तो यह खबर जरूर पूरी पढ़ें. आइए जानते हैं स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के उपाय.
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क्या है स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम?
स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम को डिजिटल आई स्ट्रेन भी कहा जाता है. यह तब होता है जब हम लंबे समय तक स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट का उपयोग करते हैं, जिससे आंखों में तनाव, धुंधलापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. औसतन, लोग हर दिन 6 घंटे 40 मिनट स्क्रीन पर बिताते हैं. Gen Z के लिए यह समय और भी अधिक (9 घंटे प्रतिदिन) है!
यह बढ़ता स्क्रीन टाइम हमारी आंखों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.
स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम के कारण
लंबे समय तक स्क्रीन देखना: बिना ब्रेक लिए लगातार फोन, लैपटॉप या टीवी देखना.
कम पलक झपकाना: स्क्रीन देखते समय हमारी पलकें सामान्य से 60% कम झपकती हैं, जिससे आंखें सूख जाती हैं.
फोन को बहुत पास से देखना: इससे आंखों की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है.
अंधेरे में फोन चलाना: रोशनी कम होने पर स्क्रीन देखने से आंखों पर ज्यादा तनाव पड़ता है.
ब्लू लाइट का प्रभाव: फोन और अन्य डिजिटल डिवाइसेज़ से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है.
स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम के लक्षण
- आंखों में जलन और थकान
- धुंधला दिखना और फोकस करने में परेशानी
- लगातार सिरदर्द
- सूखी और लाल आंखें
- गर्दन और कंधों में दर्द
- नींद न आना (ब्लू लाइट की वजह से स्लीप साइकल प्रभावित होती है)
अगर आप भी इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ रहा है!
स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम का इलाज
- आर्टिफिशियल टियर्स (आई ड्रॉप्स): आंखों की नमी बनाए रखने में मदद करती हैं.
- ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे का इस्तेमाल करें.
- 20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड के लिए देखें.
- फोन और स्क्रीन को उचित दूरी पर रखें (कम से कम 16-24 इंच).
- आई एक्सरसाइज और ब्रेक लें: आंखों को घुमाएं और हल्के हाथों से मसाज करें.
- अगर समस्या बनी रहती है, तो आंखों के डॉक्टर से संपर्क करें.
आंखों की सुरक्षा के लिए आसान टिप्स
- स्क्रीन टाइम सीमित करें – जरूरत से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल न करें.
- ब्लिंक ज्यादा करें – पलकें ज्यादा झपकाने से आंखों में नमी बनी रहती है.
- स्क्रीन ब्राइटनेस कम करें – बहुत ज्यादा चमकदार स्क्रीन आंखों के लिए हानिकारक होती है.
- रात में "ब्लू लाइट फ़िल्टर" ऑन करें.
- सही पोजीशन में बैठें – गर्दन और पीठ सीधी रखें, फोन बहुत पास न लाएं.
- अच्छी रोशनी में फोन इस्तेमाल करें.
- पर्याप्त पानी पिएं और स्वस्थ आहार लें.
क्या बच्चों को ज्यादा खतरा है?
बच्चों की आंखें वयस्कों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती हैं. बच्चे आमतौर पर फोन बहुत करीब से देखते हैं, जिससे ब्लू लाइट का प्रभाव ज्यादा पड़ता है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है. अगर आपका बच्चा भी ज्यादा स्क्रीन देखता है, तो उसकी आंखों की देखभाल करना बहुत जरूरी है!
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श लें.













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