What Is Guillain-Barre Syndrome? गिलेन बैरे सिंड्रोम क्या है, जानें इस दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार के बारे में; पुणे में आ चुके हैं 26 केस
Guillain Barre Syndrome | Representative Image: Free Malaysia Today

Guillain-Barre Syndrome: पुणे में गिलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome या GBS) के मामलों में अचानक वृद्धि देखने को मिली है. सिर्फ एक सप्ताह में, तीन प्रमुख अस्पतालों में इस दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार के 26 मरीज सामने आए हैं. ये मामले मुख्यतः सिंहगढ़ रोड, धायरी और आसपास के क्षेत्रों से रिपोर्ट किए गए हैं. प्रभावित लोगों में बच्चों से लेकर वयस्क तक शामिल हैं, जिनमें डायरिया और पेट दर्द के बाद हाथ-पैरों में कमजोरी और लकवे जैसे लक्षण दिखे.

डॉक्टरों का मानना है कि यह बढ़ोतरी दूषित पानी या खाने के सेवन के कारण हो सकती है. अधिकतर मरीजों ने बाहर का खाना खाने के बाद लक्षणों की शिकायत की. बच्चों (खासकर 8-15 साल के) पर इस संक्रमण का गंभीर प्रभाव देखा जा रहा है. आइए समझते हैं कि गिलेन-बैरे सिंड्रोम क्या है और यह अचानक बढ़ोतरी क्यों चिंताजनक है.

गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) क्या है?

गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से नसों (Nerves) पर हमला करती है. इसका असर मुख्य रूप से शरीर की परिधीय नसों पर पड़ता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी, और गंभीर मामलों में लकवा तक हो सकता है.

कैसे होता है यह विकार?

यह स्थिति आमतौर पर किसी संक्रमण (बैक्टीरियल या वायरल) के बाद विकसित होती है. संक्रमण के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली का ओवररिएक्शन नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है.

यह विकार तेजी से बढ़ सकता है और लक्षण कुछ दिनों या हफ्तों में गंभीर हो सकते हैं.

गिलेन-बैरे सिंड्रोम का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह अक्सर दूषित भोजन, पानी, या संक्रमणों जैसे कैंपिलोबैक्टर (Campylobacter) बैक्टीरिया से जुड़ा होता है.

गिलेन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण

  • हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नता.
  • मांसपेशियों में कमजोरी और चलने-फिरने में दिक्कत.
  • गंभीर मामलों में सांस लेने और निगलने में कठिनाई.

गिलेन-बैरे सिंड्रोम का इलाज

इम्यूनोथेरेपी: इसमें इंट्रावीनस इम्यूनोग्लोबुलिन (IVIG) और प्लाज्मा एक्सचेंज शामिल हैं, जो नसों को नुकसान से बचाते हैं और जल्दी ठीक होने में मदद करते हैं.

सपोर्टिव केयर: फिजियोथेरेपी, और गंभीर मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है.

अधिकांश मरीज समय के साथ पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ को लंबे समय तक कमजोरी या थकान का अनुभव हो सकता है.

पुणे में अचानक वृद्धि का कारण

पुणे में गिलेन-बैरे सिंड्रोम के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण दूषित खाना और पानी बताया जा रहा है. कई मरीजों ने बाहर का खाना खाने की बात स्वीकार की है. बच्चों और युवा वयस्कों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है. स्वास्थ्य विभाग अभी भी इस वृद्धि के कारणों की जांच कर रहा है.

सावधानियां और बचाव के उपाय

पानी उबालकर पिएं: दूषित पानी से बचने के लिए केवल साफ और उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करें.

खाद्य स्वच्छता का पालन करें: बाहर का खाना खाने से बचें और घर का स्वच्छ भोजन करें.

संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज न करें: डायरिया या पेट दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

इम्यूनिटी बढ़ाएं: पोषणयुक्त आहार लें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

गिलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ लेकिन गंभीर विकार है, जिसमें शुरुआती पहचान और सही इलाज से मरीजों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. पुणे में मामलों की अचानक बढ़ोतरी चिंताजनक है, लेकिन सावधानी और जागरूकता से इसे रोका जा सकता है.