Puthandu 2026 Messages in Hindi: दक्षिण भारत और दुनिया भर में बसे तमिल समुदाय के लिए आज का दिन विशेष हर्षोल्लास का है. दरअसल, 14 अप्रैल 2026 को तमिल नववर्ष (Tamil New Year) यानी 'पुथांडु' (Puthandu) मनाया जा रहा है. तमिल सौर कैलेंडर के अनुसार, चिथिरई महीने का पहला दिन नई शुरुआत का प्रतीक है. खगोलीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज ही के दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति के रूप में जाना जाता है.
पुथांडु का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, जिसके प्रमाण 2,000 साल पुराने संगम काल के साहित्य में भी मिलते हैं. इसे 'चिथिरई' और 'वरुशा पिरप्पू' के नाम से भी संबोधित किया जाता है. ऐतिहासिक रूप से यह पर्व कृषि प्रथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. यह समय रबी की फसलों की कटाई का होता है, इसलिए किसान अपनी अच्छी उपज के लिए ईश्वर को अनाज अर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं.
पुथांडु के इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को ‘पुथांडु वाजथुकल’ (Puthandu Vazthukal) कहकर बधाई देते हैं. तमिल भाषा में 'पुथांडु' का अर्थ नया साल और 'वाजथुकल' का अर्थ शुभकामना है. डिजिटल युग में लोग पारंपरिक बधाई के साथ-साथ हिंदी कोट्स, व्हाट्सएप संदेशों और फेसबुक ग्रीटिंग्स के माध्यम से भी अपने परिजनों को नववर्ष की शुभकामनाएं भेज रहे हैं.





पुथांडु के दौरान घरों में उत्साह का माहौल रहता है. उत्सव की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सजावट: लोग अपने घरों की साफ-सफाई कर मुख्य द्वार पर चावल के आटे से सुंदर रंगोली (कोलम) बनाते हैं.
- पारंपरिक वेशभूषा: परिवार के सभी सदस्य नए और पारंपरिक वस्त्र धारण कर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.
- मंगा पचड़ी: इस दिन का सबसे विशेष व्यंजन 'मंगा पचड़ी' है. गुड़, कच्चे आम और नीम के फूलों से तैयार यह पकवान जीवन के कड़वे-मीठे अनुभवों को समान रूप से स्वीकार करने का संदेश देता है.
पुथांडु केवल एक व्यक्तिगत उत्सव नहीं है, बल्कि यह तमिल संस्कृति की समृद्ध विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक है. मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं और लोग सामूहिक भोज के जरिए आपसी भाईचारे को बढ़ावा देते हैं. अच्छी वर्षा और खुशहाली की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व तमिल पहचान का एक अभिन्न अंग बना हुआ है.













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