त्योहार

नेशनल डॉक्टर्स डे 2020: समर्पण, निष्ठा, ईमानदारी, लगन को सलाम करने का दिन

जिंदगी देने वाले के साथ ही जिंदगी बचाने वाले के भी हम उतने ही आभारी रहते हैं जितने भगवान के। माता-पिता जिंदगी देते हैं, लेकिन अक्सर बचाने वालों में डॉक्टर का नाम सबसे उपर रहता है. तमाम डॉक्टर हैं जो अपने पेशे की सही कीमत और मूल्य को पहचानते हैं, उन्हीं डॉक्टरों को भारत में भगवान का दर्जा दिया जाता है.

नेशनल डॉक्टर्स डे 2020: समर्पण, निष्ठा, ईमानदारी, लगन को सलाम करने का दिन
नेशनल डॉक्टर्स डे 2020 (Photo Credits: File Image)

जिंदगी देने वाले के साथ ही जिंदगी बचाने वाले के भी हम उतने ही आभारी रहते हैं जितने भगवान के। माता-पिता जिंदगी देते हैं, लेकिन अक्सर बचाने वालों में डॉक्टर का नाम सबसे उपर रहता है. तमाम डॉक्टर हैं जो अपने पेशे की सही कीमत और मूल्य को पहचानते हैं, उन्हीं डॉक्टरों को भारत में भगवान का दर्जा दिया जाता है.  हर साल एक जुलाई को डॉक्टर के समर्पण, कार्य के प्रति निष्ठा, ईमानदारी, लगन को सलाम करने के लिए और उन्हें सलाम करने के लिए डॉक्‍टर्स डे के रूप में मनाया जाता है.

आज दुनिया में चिकित्सा की कई पद्धतियों से जुड़े चिकित्सक हैं, जिसमें एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, इलेक्ट्रोपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, आहार चिकित्सा और कई थैरपी आदि हैं, जो अपने-अपने तरीकों से जिंदगी बचाने में योगदान दे रहे हैं. यह भी पढ़े: National Doctors’ Day 2020 Wishes: नेशनल डॉक्टर्स डे पर इन WhatsApp Stickers, GIFs और Facebook ग्रीटिंग्स के जरिए फ्रंटलाइन वॉरियर्स को दें धन्यवाद

कोरोना वायरस में डॉक्टरों ने कायम की मिसाल

इस बार 2020 में 30वां राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जा रहा है। 2020 डॉक्टरों के लिए चुनौती भरा साल है। जहां वो एक अनजान और घातक वायरस से जंग लड़ रहे हैं और उन पर तमाम लोगों की जिंदगी बचाने की ज़िम्मेदारी भी है। वायरस से इस लड़ाई में डॉक्टर ही सबसे आगे खड़े हैं, और संक्रमित लोगों की जिंदगी बचा रहे हैं. महामारी के दौर में कई डॉक्टरों नें ऐसी मिसाल पेश की जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा.

चाहे भीषण गर्मी में पीपीई किट पहन कर गंभीर संक्रमण के बीच मरीजों का इलाज करना हो या 12-12 घंटे लगातार बिना-खाए पीए मरीजों का इलाज करना हो। हर मौके पर चिकित्सक पूरी निष्‍ठा और लगन से तैनात रहे। हाल ही में वायरस से संक्रमित एक मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर ने अपनी पीपीई किट तक उतार दी। क्योंकि पीपीई किट पहन कर वो ऑक्सीजन की नली ठीक नहीं कर सकते थे। हालांकि उसके बाद डॉक्टर को 14 दिन के लिए क्वारनटाइन में रहना पड़ा.

एक जुलाई को क्यों मनाया जाता है डॉक्‍टर्स डे

दुनिया के कई देशों में डॉक्टर्स डे अलग-अलग तारीखों में मनाया जाता है. कुछ देश इस दिन छुट्टी मनाते हैं। भारत में यह 1 जुलाई को डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के सबसे प्रसिद्ध चिकित्सकों में से एक थे। वह चिकित्सक के अलावा पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी थे। एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् के साथ-साथ एक स्वतंत्रता सेनानी भी। महात्मा गांधी के साथ वे सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़े थे.

भारत सरकार ने समाज में उनके अपार योगदान के लिए 1961 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया। इसके बाद औपचारिक रूप से 1991 में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाने की घोषणा की. वहीं दूसरे देशों की बात करें तो अमेरिका में 30 मार्च, ईरान में 23 अगस्त को चिकित्सक दिवस मनाता है। ब्राजील में 18 अक्टूबर को छुट्टी के रूप में मनाया जाता है. क्यूबा में, राष्ट्रीय डॉक्टरों का दिवस कार्लोस जुआन फिनेले के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 3 दिसंबर को अवकाश के रूप में मनाया जाता है.भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का दिन एक बड़ा जागरूकता अभियान है, जो सभी को डॉक्टरों की भूमिकाओं, महत्व और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने के लिए है। साथ ही डॉक्टर्स डे चिकित्सा पेशेवरों को प्रोत्साहित करने और उनके पेशे की जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए बड़ा अवसर प्रदान करता है.

देश में डॉक्‍टरों की संख्‍या

देश भर में डॉक्‍टरों की संख्‍या की बात करें तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 96,646 चिकित्सक फेकल्‍टी के रूप में मौजूद हैं। यानी वो मेडिक कॉलेजों में पढ़ाते हैं और साथ में इलाज भी करते हैं। राज्‍यों की बात करें तो सबसे ज्‍यादा फेकल्‍टी डॉक्‍टर कर्नाटक में हैं। जहां उनकी संख्‍या कुल 11432 है। वहीं तमिलनाडु 10755, महाराष्‍ट्र में 10421 फेकल्‍टी हैं। बाकी राज्‍यों में फेकल्‍टी 10 हजार से कम है। वहीं देश में बोर्ड स्‍पेशियलिटी के पीजी स्‍टूडेंट्स की कुल संख्‍या 75,235 है.

देश में कुल 26,967 सीनियर रेजिडेंट डॉक्‍टर हैं और 19,999 नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्‍टर हैं। सुपर‍ स्‍पेशियलिटी के कुल 7748 पीजी छात्र हैं। देश में सबसे ज्यादा सीनियर रेजिडेंट डॉक्‍टर दिल्‍ली (3091) में हैं। सीनियर रेजिडेंट के मामले में महाराष्‍ट्र (249) दूसरे नंबर पर तमिलनाडु (2270) तीसरे नंबर पर और उत्तर प्रदेश (2248) चौथे नंबर पर है.

अगर आपको चिकित्सा क्षेत्र से कोई भी आंकड़े चाहिए हों, तो आप एमसीआई की वेबसाइट https://www.mciindia.org/ पर जाकर देख सकते हैं। फिर चाहे मेडिकल कॉलेज से जुड़ी जानकारी चाहिए हो या फिर किसी भी डॉक्‍टर की एमबीबीएस डिग्री के बारे में पता करना हो, आप डॉक्‍टर का रजिस्‍ट्रेशन नंबर डाल कर डॉक्‍टर के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। यही नहीं कोई डॉक्‍टर अगर एमसीआई द्वारा प्रतिबंध‍ित है यानी अगर किसी डॉक्‍टर को ब्‍लैकलिस्‍ट किया गया है, तो उसके बोर में भी आप यहां पता कर सकते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 30, 2020 08:43 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).