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VIDEO: काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसान होली! बनारस में चिताओं की राख से खेली जाने वाली HOLI का विरोध क्यों? वाराणसी में आस्था बनाम परंपरा पर छिड़ी बहस

काशी के मणिकर्णिका घाट पर होने वाली मसान होली को लेकर विवाद बढ़ गया है. जहां कुछ लोग इसे शिव की प्राचीन परंपरा मानते हैं, वहीं कई हिंदू संगठन और बुद्धिजीवी इसका विरोध कर रहे हैं. प्रशासन ने 11 मार्च 2024 को होने वाले आयोजन के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं.

VIDEO: काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसान होली! बनारस में चिताओं की राख से खेली जाने वाली HOLI का विरोध क्यों? वाराणसी में आस्था बनाम परंपरा पर छिड़ी बहस

Varanasi Masan Holi 2025: वाराणसी का मणिकर्णिका घाट एक बार फिर चर्चा में है, इस बार चिताओं की राख से खेली जाने वाली मसान होली को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. 10 और 11 मार्च को आयोजित होने वाली इस परंपरा का एक पक्ष समर्थन कर रहा है तो दूसरा पक्ष विरोध में उतर आया है. कई हिंदू संगठन और विद्वानों का कहना है कि भस्म होली का उल्लेख किसी भी शास्त्र में नहीं किया गया है.

क्या है मसान होली की परंपरा?

बाबा महाश्मशान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर के अनुसार, रंगभरी एकादशी के अगले दिन भगवान भोलेनाथ मध्याह्न स्नान करने मणिकर्णिका तीर्थ पर आते हैं और फिर अपने प्रियगणों के साथ चिता भस्म से होली खेलते हैं. मान्यता है कि यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है.

विरोध क्यों हो रहा है?

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी सहित कई बुद्धिजीवी इस आयोजन का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि श्मशान घाट पर शव पड़े होते हैं और वहां उत्सव मनाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि काशी की परंपरा में ऐसा आयोजन नहीं होता था और इसे बंद किया जाना चाहिए.

हिंदू संगठनों की अपील

काशी विद्वत परिषद, विश्व वैदिक सनातन न्यास सहित अन्य हिंदू संगठनों ने बैठक कर इस आयोजन पर चिंता जताई. उन्होंने गृहस्थों, युवाओं और महिलाओं से अपील की कि वे इस आयोजन से दूर रहें. उन्होंने इसे धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अनुचित बताया.

देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं

भले ही विरोध हो रहा हो, लेकिन मसान होली में भाग लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं. भक्तों का मानना है कि भगवान शिव रंगभरी एकादशी पर माता पार्वती का गौना कराकर लौटते हैं और देवी-देवताओं के साथ भूत-पिशाचों के संग श्मशान में भस्म होली खेलते हैं.

प्रशासन के निर्देश

डीसीपी गौरव बंसल के अनुसार, यह आयोजन 11 मार्च को दोपहर 12 से 1 बजे तक मात्र एक घंटे के लिए होगा. डीजे पर प्रतिबंध रहेगा, और श्रद्धालुओं का प्रवेश कचौरी गली और मणिकर्णिका घाट की गलियों से होगा. सुरक्षा के लिए जल पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी बाढ़ राहत दल और छह थानों की पुलिस फोर्स तैनात रहेगी. साथ ही, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी.

मसान होली को लेकर वाराणसी में समर्थन और विरोध दोनों पक्ष सामने आए हैं. एक ओर जहां यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर कई विद्वान और हिंदू संगठन इसे अनुचित मान रहे हैं. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, जिससे यह आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 08, 2025 03:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).