Kajari Teej 2025 Wishes in Hindi: साल में कई बार सुहागन महिलाएं (Married Women) अखंड सौभाग्य की कामना से तीज का व्रत करती हैं. सावन महीने की हरियाली तीज (Hariyal Teej) के बाद हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज (Kajari Teej) का पर्व मनाया जाता है. कजरी तीज आमतौर पर रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) के तीन दिन बाद और कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) से पांच दिन पहले मनाई जाती है. इसे बड़ी तीज, कजली तीज और सातुड़ी तीज जैसे नामों से भी जाना जाता है. इस साल 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज मनाई जा रही है. इस दिन निर्जल व्रत रखकर महिलाएं भगवान शिव-माता पार्वती (Bhagwan Shiv-Mata Parvati) की पूजा करती हैं और उनसे सुखी-वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगती है. इसके साथ ही इस दिन शाम के समय महिलाएं इकट्ठा होती हैं और नीम के पेड़ की कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेहंदी से पूजा करते हुए फल और मिठाई अर्पित करती हैं. इसके साथ इस व्रत की कथा पढ़ी या सुनी जाती है.
ऐसी मान्यता है कि कजरी तीज के व्रत से सुहागन महिलाओं को खुशहाल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है, जबकि कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के अलावा रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं. इस अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए सखी-सहेलियों को कजरी तीज की शुभकामनाएं दे सकती हैं.
कन्याओं को उनका मनचाहा जीवनसाथी मिले,
निर्जला व्रत कर करें कजरी तीज का पाठ,
घर-परिवार सदा रहेगा खुशहाल.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

रंग-बिरंगे परिधान सजाए,
सखियों संग नाचे गाएं,
सपनों में भी तीज मनाएं.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

सुहागन ने किया सोलह श्रृंगार है,
अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत है,
आप को माता पार्वती का वरदान है,
रहें सदा सुहागन, हमेशा शिव का आशीर्वाद है.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

हवा में घुली खुशबू की दमक,
सोलह श्रृंगार से सज गई हर गोरी की मांग,
आज तीज पर दिखेगी सभी की शान.
कजरी तीज की शुभकामनाएं

दिल की श्रद्धा और सच्चे विश्वास का,
बिछिया पैरों में हो,
माथे पर बिंदिया...

देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले इस पर्व में कुछ समुदायों में महिलाएं चंद्रमा की पूजा के बाद सत्तू या फल खाकर अपने व्रत का पारण करती हैं. जहां विवाहित महिलाएं कजरी तीज पर व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं तो वहीं कुवांरी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को करती हैं. इस पर्व को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों में बहुत ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है.













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