Jaya Ekadashi 2025 Wishes: शुभ जया एकादशी! प्रियजनों संग शेयर करें ये भक्तिमय हिंदी Quotes, WhatsApp Messages और Facebook Greetings
जया एकादशी का व्रत न सिर्फ व्यक्ति के समस्त पाप कर्मों को नष्ट करता है, बल्कि वह सांसारिक कष्टों से भी मुक्त हो जाता है. इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती और वैकुंठ प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस अवसर पर आप इन भक्तिमय हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस और फेसबुक ग्रीटिंग्स को अपने प्रियजनों संग शेयर करके उनसे शुभ जया एकादशी कह सकते हैं.
Jaya Ekadashi 2025 Wishes in Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी (Jaya Ekadashi) मनाई जाती है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से इस साल जया एकादशी 8 फरवरी 2025 को मनाई जा रही है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) की पूजा करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. कहा जाता है कि माघ मास की जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है यानी मृत्यु के बाद इस व्रत का पालन करने वालों को पिशाच या प्रेत योनी में नहीं जाना पड़ता है, साथ ही इस जन्म और पिछले जन्म में किए गए पापों से भी छुटकारा मिलता है और मोक्ष का मार्ग खुलता है.
जया एकादशी का व्रत न सिर्फ व्यक्ति के समस्त पाप कर्मों को नष्ट करता है, बल्कि वह सांसारिक कष्टों से भी मुक्त हो जाता है. इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती और वैकुंठ प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस अवसर पर आप इन भक्तिमय हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस और फेसबुक ग्रीटिंग्स को अपने प्रियजनों संग शेयर करके उनसे शुभ जया एकादशी कह सकते हैं.
शुभ जया एकादशी
शुभ जया एकादशी
शुभ जया एकादशी
शुभ जया एकादशी
शुभ जया एकादशी
गौरतलब है कि जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और सात्विक रहते हुए श्रीहरि का ध्यान व पूजन करना चाहिए. पूजन के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति को शंख के जल से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उच्चारण करते हुए स्नान कराना चाहिए, फिर वस्त्र, चंदन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप, नैवेद्य, मौसमी फल, नारियल इत्यादि अर्पित करना चाहिए. पूजा के बाद आखिर में आरती उतारनी चाहिए. इसके बाद द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और दक्षिणा देने के बाद अपने व्रत का पारण करना चाहिए.