International Yoga Day 2025: 21 जून को ही क्यों मनाते हैं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस? जानें भारतीय पीएम की किन बातों से प्रभावित हुआ था संयुक्त राष्ट्र संघ!
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 (Photo Credits: File Image)

International Yoga Day 2025: कहा जाता है कि 27 सितंबर 2014 को जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देते हुए तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा तो 193 देशों में चीन समेत 177 देशों का तत्काल समर्थन मिल गया. इसके पश्चात 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्वीकृति दे दी, इसके बाद न्यूयॉर्क, पेरिस, बीजिंग, बैंकॉक, कुआलालंपुर, सियोल और नई दिल्ली समेत दुनिया भर में 21 जून 2015 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस सफलतापूर्वक मनाया गया. योग दिवस को अपार सफलता मिली लेकिन एक प्रश्न लगभग हर आम इंसान के मन में होगा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून की तारीख ही क्यों सुनिश्चित किया गया. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2025) पर हम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित कुछ रोचक पहलुओं पर बात करेंगे. यह भी पढ़ें: International Eye Donation Day 2025 Quotes: ‘अपनी आंखों से नेत्रहीनों को भी दुनिया देखने दें’, अधिकतम लोगों तक भेजें ये प्रेरक कोट्स!

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

भौगोलिक दृष्टि से 21 जून का दिन उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) का दिन होता है, यानी साल का सबसे लंबा दिन. इसके बाद से दिन के घंटे क्रमशः कम और रातें लंबी होने लगती हैं. यह प्रकृति के एक लंबे महत्वपूर्ण परिवर्तन का भी संकेत देता है. योग दर्शन में इसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिन माना जाता है. इसके साथ-साथ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस सुनिश्चित करने की वजह प्राकृतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है.

योग का पौराणिक परिचय

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े योगी हैं, जिन्हें आदियोगी भी कहा जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने ही सबसे पहले योग का ज्ञान सप्त ऋषियों को दिया था, तथा योग के आठ अंगों, जैसे यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का विकास महर्षि पतंजलि ने किया था.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस क्यों जरूरी है

साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ (अमेरिका) के समक्ष योग को विश्व पटल पर लाने के उद्देश्य से तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, योग के सार्वभौमिक महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा था कि योग केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज का मूल विषय है. हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है. कहा जाता है कि भारतीय पीएम की इन बातों की राष्ट्र संघ ने स्वागत और समर्थन किया था.