Hazrat Nizamuddin Auliya Urs Mubarak 2021: हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक! शेयर करें ये HD Images, WhatsApp Stickers, Greetings और वॉलपेपर्स
हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

Hazrat Khwaja Nizamuddin Auliya Urs Mubarak 2021: हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया (Hazrat Khwaja Nizamuddin Auliya) चिश्ती घराने के चौथे संत थे, जिन्होंने वैराग्य और सहनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की. इस सूफी संत (Sufi Saint) ने 3 अप्रैल 1325 को 92 साल की उम्र में प्राण त्यागे थे और उसी साल उनके मकबरे का निर्माण कार्य आरंभ किया गया था, लेकिन 1562 तक उसका नवीनीकरण होता रहा. दक्षिणी दिल्ली में स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया (Hazrat Nizamuddin Auliya) का मकबरा सूफी काल का एक पवित्र दरगाह है, जिसमें सभी धर्म के लोगों की आस्था है. इस साल हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया का 718 वां उर्स मुबारक मनाया जा रहा है. दरअसल, हिजरी कैलेंडर के अनुसार, इस सूफी संत का उर्स रबी-उल-आखिर की सत्रहवीं तारीख को मनाया जाता है. कहा जाता है कि उनका खानदान मध्य एशिया के शहर बुखारा से हिजरत करके लाहौर होता हुआ यूपी के बदायूं पहुंचा था, जहां 642 हिजरी (सन 1238) में ख्वाजा अहमद के घर उनका जन्म हुआ था.

हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया का पूरा नाम मुहम्मद बिन अहमद बिन दानियाल अल बुखारी था. पांच साल की उम्र में ही उनके सिर के पिता का साया उठ गया था. पिता के निधन के बाद वो अपनी बहन के साथ दिल्ली आए और यहां उलेमा से औपचारिक शिक्षा ग्रहण की, इसके बाद वे बाबा फरीदुद्दीन गंज शकर के शिष्य बने और उनसे सूफीमत और सुलूक की सर्वश्रेष्ठ मंजिलें तय कीं. हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स पर आप अपनों के साथ इन एचडी इमेजेस, वॉट्सऐप स्टिकर्स, ग्रीटिंग्स और वॉलपेपर्स को शेयर कर सकते हैं.

1- हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक

हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

2- हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक

हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

3- हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक

हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

4- हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक

हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

5- हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक

हजरत निजामुद्दीन औलिया उर्स मुबारक (Photo Credits: File Image)

कहा जाता है कि जब हजरत निजामुद्दीन औलिया अजोधन से दिल्ली लौटने लगे तब बाबा फरीदुद्दीन ने उन्हें  दो नसीहतें दी. पहली यह कि अगर किसी से कर्ज लेना तो उसे जल्द अदा करना और दूसरी अपने दुश्मनों से भी ऐसा व्यवहार करना कि उन्हें यह समझ में आ जाए कि तुम उनके दोस्त हो. अजोधन से दिल्ली लौटने के बाद वे दिल्ली की सीमावर्ती बस्ती गयासपुर में एक किराए के मकान में रहते थे, जो अब हजरत निजामुद्दीन के नाम से मशहूर है. यहीं से उन्होंने रूहानी और विद्वतापूर्ण दानशीलता और लोक कल्याण का सिलसिला शुरु किया जो अब भी दरगाह के माध्यम से जारी है.