Five Day Ganesh Visarjan 2025 Schedule: पांच दिन की गणपति का इस दिन होगा विसर्जन, यहां देखें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हिंदू त्योहार गणेश विसर्जन, भगवान गणेश के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्हें आरंभ, ज्ञान और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है. यह उत्सव, जिसे विनायक गणेश विसर्जन के नाम से भी जाना जाता है, शुक्ल पक्ष गणेश विसर्जन से शुरू होता है और पूरे हिंदू कैलेंडर माह भाद्रपद तक चलता है. यह उत्सव दस दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है...
Five Day Ganesh Visarjan 2025 Schedule: हिंदू त्योहार गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan), भगवान गणेश के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्हें आरंभ, ज्ञान और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है. यह उत्सव, जिसे विनायक गणेश विसर्जन के नाम से भी जाना जाता है, शुक्ल पक्ष गणेश विसर्जन से शुरू होता है और पूरे हिंदू कैलेंडर माह भाद्रपद तक चलता है. यह उत्सव दस दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है, और इसकी तिथि आमतौर पर अगस्त और सितंबर के बीच पड़ती है. महाराष्ट्र में यह त्योहार बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है. सभी घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश की मूर्तियां स्थापित की जातीं हैं. महाराष्ट्र में 10 दिन तक जश्न का माहौल होता है. कोई डेढ़ दिन की गणपति बैठाता है तो कोई पांच दिन की. यह भी पढ़ें: Hartalika Teej 2025 Shubh Yog: हरतालिका तीज पर बन रहे हैं चार शुभ योग, व्रत को बनाएंगे और भी फलदायी
अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) को गणेश विसर्जन का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, फिर भी कई परिवार गणेश चतुर्थी के तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी मूर्ति विसर्जन करते हैं. ये सभी दिन विषम तिथियां हैं. यहां तक कि सबसे प्रमुख विसर्जन दिवस, अनंत चतुर्दशी भी गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन आता है, जो स्वयं एक विषम संख्या है. यह परंपरा दर्शाती है कि विषम तिथियों को गणपति विसर्जन के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है. लोग अपनी- अपनी समर्थता के अनुसार बाप्पा की मूर्ति बैठाते हैं. कोई डेढ़ दिन की गणपति बैठाता है तो कोई 5 दिन की. अगर आप पांच दिन के गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानना चाहते हैं तो नीचे देख सकते हैं.
5वें दिन रविवार, 31 अगस्त 2025 को गणेश विसर्जन (Five Day Ganesh Visarjan)
गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - सुबह 07:34 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक
दोपहर का मुहूर्त (शुभ)- 01:57 PM से 03:32 PM तक
शाम का मुहूर्त (शुभ, अमृता, चर) - शाम 06:44 बजे से रात 10:57 बजे तक
01 सितंबर, रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 01:46 पूर्वाह्न से 03:10 पूर्वाह्न तक,
01 सितम्बर, प्रातःकालीन मुहूर्त (शुभ) - प्रातः 04:35 से प्रातः 05:59 तक
आप भगवान को डेढ़, तीन, सात या दस दिन तक रख सकते हैं. यह आपकी आस्था और ख़ास तौर पर आपके इलाके पर निर्भर करता है. आप त्योहार कितने भी समय तक मनाते हों, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता; अंत सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए. विसर्जन के दिन इस चरण-दर-चरण प्रक्रिया का पालन करें.
विसर्जन
मूर्ति को किसी जलाशय के पास ले जाएं और आखिरी बार बाप्पा की आरती करें. उन्हें आदरपूर्वक, अंतिम पूजा में इस्तेमाल की गई सभी सामग्रियों सहित, धीरे-धीरे विसर्जित करें. बाप्पा को विदा करना काफी इमोशनल पल होता है, इस दौरान आखें भर आती हैं. आप अपना मन शांत रखें. क्योंकि यह तो सभी के लिए नियति है; जो यहां आता है, उसे जाना भी होता है. बाप्पा से अगले वर्ष जल्दी लौटने का अनुरोध करें.
इन नियमों का सख्ती से पालन करें
हमारी संस्कृति हमें अपने मेहमानों को भगवान मानकर उनका आदर करना सिखाती है, "अतिथि देवो भव", लेकिन यहां तो भगवान हमारे घर स्वयं पधार रहे हैं, जिससे हमारी ज़िम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं. इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरुरी है.
- त्योहार के दौरान परिवार के सभी सदस्यों को लहसुन और प्याज़ का सेवन नहीं करना चाहिए.
- गणपति को सबसे पहले सब कुछ अर्पित करें, चाहे वह भोजन हो, जल हो, चाय या प्रसाद आदि हो.
- जब भगवान घर में हों, तो घर बंद का रुन्हे अकेला छोड़कर न जाएं. कम से कम एक सदस्य हमेशा घर पर अवश्य रहे.
- जुआ, मांस-मदिरा, धोखाधड़ी, चोरी, गाली-गलौज, झगड़े आदि जैसी हानिकारक गतिविधियों से सख़्ती से बचें.
नकारात्मक विचारों से बचने की कोशिश करें; त्योहार की सकारात्मक ऊर्जा को समझें और अपने विचारों को बनाए रखने के लिए ध्यान करें.