Chhath Puja 2025 Geet: छठी मैया और सूर्य देव को समर्पित इन भक्तिमय गीतों के जरिए बनाएं छठ पूजा के इस महापर्व को खास
छठ पूजा के दौरान तमाम भक्त और व्रत रखने वाले व्रती छठी मैया और सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. इसके साथ ही छठ के भक्तिमय गीत गाए जाते हैं और सुने भी जाते हैं. ऐसे में छठ महापर्व पर आप भी छठी मैया के इन भक्तिमय गीतों को सुनकर इस पर्व को खास बना सकते हैं, साथ ही इन गीतों से जरिए सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अपनी श्रद्धा भी प्रकट कर सकते हैं.
Chhath Puja 2025 Geet: लोक आस्था के महापर्व चार दिवसीय छठ पूजा (Chhath Puja) की शुरुआत हो चुकी है और अधिकांश श्रद्धालु श्रद्धा व आस्था में सराबोर नजर आ रहे हैं. आज यानी 26 अक्टूबर 2025 छठ पूजा का दूसरा दिन है. इस दिन खरना (Kharna) पूजा का विधान है और अगले दिन यानी तीसरे व सबसे महत्वपूर्ण दिन व्रती अस्त होते हुए सूक्य को अर्घ्य देंगे. खरना का महत्व छठ पर्व में खरना का दिन अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है. छठ पूजा के दूसरे दिन यानी खरना को शारीरिक और मानसिक पवित्रता प्राप्त करने का प्रतीक माना गया है. इसके अगले दिन शाम के समय व्रती पानी में खड़े रहकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दौरान हर तरफ छठी मैया और सूर्य देव के भक्तिमय गीत सुनाई देते हैं.
छठ पूजा के दौरान तमाम भक्त और व्रत रखने वाले व्रती छठी मैया और सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. इसके साथ ही छठ के भक्तिमय गीत गाए जाते हैं और सुने भी जाते हैं. ऐसे में छठ महापर्व पर आप भी छठी मैया के इन भक्तिमय गीतों को सुनकर इस पर्व को खास बना सकते हैं, साथ ही इन गीतों से जरिए सूर्य देव और छठी मैया के प्रति अपनी श्रद्धा भी प्रकट कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: Sharda Sinha Chhath Geet: पीएम मोदी ने स्वर्गीय शारदा सिन्हा का छठ गीत किया शेयर, देखें वीडियो
उगी ए सूरज देव...
जोड़े-जोड़े फलवा...
पहिले पहिल छठी मैया...
केलवा के पात पर...
जय छठी मैया...
गौरतलब है कि इस साल छठ पूजा का मुख्य पर्व 27 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है. दरअसल, नहाय-खाय और खरना के बाद तीसरे दिन छठ पूजा का सबसे मुख्य पर्व होता है. इस दिन शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. चौथे दिन सुबह के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे ऊषा अर्घ्य कहा जाता है. सुबह में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपने व्रत को पूर्ण करते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 26, 2025 11:36 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

