Buddha Purnima 2025 Messages: बुद्ध पूर्णिमा के इन हिंदी WhatsApp Wishes, Facebook Greetings, Quotes को शेयर कर दें प्रियजनों को शुभकामनाएं
बुद्ध पूर्णिमा का यह त्योहार सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है और आधुनिक समय में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है. मान्यता है कि गौतम बुद्ध भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिए हिंदुओं के लिए भी यह पर्व काफी महत्व रखता है. इस अवसर पर इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स को आप अपने प्रियजनों संग शेयर करके उन्हें बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Buddha Purnima 2025 Messages in Hindi: हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है, इस साल 12 मई 2025 यह पर्व मनाया जा रहा है. बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती (Buddha Jayanti) या वेसाक (Vesak) के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि पर उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. गौतम बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व छठी शताब्दी में राजा शुद्धोधन के घर हुआ था. बताया जाता है कि उनके जन्म के कुछ ही दिन बाद उनकी माता महामाया का निधन हो गया था. महामाया के निधन के बाद उनकी बहन गौतमी ने उनकी परवरिश की, इसलिए उनका नाम सिद्धार्थ गौतम पड़ा. बुद्ध पूर्णिमा के दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी खास प्रार्थना करते हैं और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का जश्न मनाया जाता है.
बुद्ध पूर्णिमा का यह त्योहार सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है और आधुनिक समय में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है. मान्यता है कि गौतम बुद्ध भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिए हिंदुओं के लिए भी यह पर्व काफी महत्व रखता है. इस अवसर पर इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स को आप अपने प्रियजनों संग शेयर करके उन्हें बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





कहा जाता है कि सिद्धार्थ गौतम के जन्म के समय राज ज्योतिष ने भविष्यवाणी करते हुए बताया था कि यह बालक बड़ा होकर संन्यास लेगा और महान संत-महात्मा बनेगा. बताया जाता है कि एक दिन सिद्धार्थ अपने महल के बाहर घूम रहे थे, तब उनकी नजर एक रोगी, वृद्ध और मृत व्यक्ति पर पड़ी. इन दृश्यों को देखने के बाद सिद्धार्थ गौतम के मन में वैराग्य की भावना जाग गई और उन्होंने संन्यास लेने का मन बना लिया. इसके बाद वो अपनी पत्नी व बच्चे को छोड़कर चले गए और कई सालों तक वन में तपस्या की. कहा जाता है कि कठोर तप के बाद 35 साल की उम्र में उन्हें बोधगया के बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिसके बाद वो सिद्धार्थ गौतम से गौतम बुद्ध बन गए.
(The above story first appeared on LatestLY on May 12, 2025 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

