मीरा भायंदर: महाराष्ट्र परिवहन विभाग (Maharashtra Transport Department) ने मीरा रोड और भायंदर इलाके (Mira Bhayandar) में ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों (Auto-Rickshaw and Taxi Drivers) के सत्यापन (Verification) के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है. इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य लाइसेंस और परमिट जारी करने में होने वाली अनियमितताओं को रोकना है. इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा (Marathi Language) का लिखित और मौखिक टेस्ट पास करना अनिवार्य कर दिया गया है. यह भी पढ़ें: Mira Bhayandar Property Tax Hike: मीरा-भाईंदर में प्रॉपर्टी टैक्स में 60% की बढ़ोतरी पर बवाल, शिंदे गुट की शिवसेना का नगर निगम के बाहर 'भीख मांगो' आंदोलन
12,000 से अधिक ड्राइवरों की होगी जांच
मीरा भायंदर क्षेत्र में संचालित होने वाले लगभग 12,000 से अधिक पंजीकृत ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों का चरणों में सत्यापन किया जा रहा है. अधिकारियों द्वारा उनके परमिट, बैच और विशेष रूप से 'डोमिसाइल सर्टिफिकेट' (अधिवास प्रमाण पत्र) की गहन जांच की जा रही है. नियमों के अनुसार, महाराष्ट्र में परमिट प्राप्त करने के लिए राज्य में कम से कम 15 वर्ष का निवास अनिवार्य है.
मराठी भाषा टेस्ट अब अनिवार्य
महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के संशोधित प्रावधानों के तहत अब ड्राइवरों को मराठी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता प्रदर्शित करनी होगी. टेस्ट के दौरान ड्राइवरों को मराठी में छोटे पैराग्राफ लिखने और मौखिक उत्तर देने के लिए कहा जा रहा है. जो ड्राइवर इस मापदंड को पूरा करने में विफल रहेंगे, उनके लाइसेंस और परमिट निलंबित किए जा सकते हैं. यह भी पढ़ें: Mumbai Metro Line 9: मिरा-भाईंदर के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी, 3 अप्रैल से काशीगांव से दहिसर के बीच शुरू होगी मुंबई मेट्रो सेवा
क्यों शुरू हुआ यह अभियान?
राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, यह कार्रवाई नरेंद्र मेहता की उस शिकायत के बाद शुरू की गई है जिसमें उन्होंने परमिट और बैच जारी करने में बड़े पैमाने पर विसंगतियों का मुद्दा उठाया था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक मामला पहुँचने के बाद, प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से यह जांच अभियान शुरू किया.
पूरे राज्य में लागू हो सकता है यह मॉडल
यह अभियान 'महाराष्ट्र दिवस' तक जारी रहेगा, जिसके बाद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लगभग 4 लाख से अधिक ड्राइवर हैं. यदि मीरा भायंदर का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो महाराष्ट्र सरकार इसे पूरे राज्य में लागू कर सकती है, जिससे परिवहन परिचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी.













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