Who Is Tuhin Kanta Pandey? 1987 बैच के IAS अधिकारी तुहिन कांत पांडे बने SEBI के नए अध्यक्ष, जानिए उनके बारे में सबकुछ

केंद्र सरकार ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नए अध्यक्ष के रूप में मौजूदा वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. वह माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 1 मार्च 2025 को समाप्त हो रहा है. तुहिन कांत पांडे अगले तीन वर्षों तक इस महत्वपूर्ण पद का कार्यभार संभालेंगे.

कौन हैं तुहिन कांत पांडे?

तुहिन कांत पांडे ओडिशा कैडर के 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की और ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से एमबीए किया. वर्तमान में वह वित्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं और वर्ष 2024 में उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था. वित्त सचिव के रूप में, उन्होंने वित्त मंत्रालय के चार प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाली है. उनकी वित्तीय मामलों में गहरी समझ और अनुभव के कारण उन्हें भारत सरकार के सबसे महत्वपूर्ण सचिवों में गिना जाता है.

महत्वपूर्ण प्रशासनिक अनुभव

  • तुहिन कांत पांडे ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है:
  • योजना आयोग (अब नीति आयोग) और कैबिनेट सचिवालय में उच्च पदों पर कार्य किया.
  • ओडिशा सरकार में स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन, वाणिज्यिक कर, परिवहन और वित्त विभागों में प्रशासनिक प्रमुख रहे.
  • केंद्र सरकार में निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM), लोक उद्यम विभाग (DPI) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में सचिव के रूप में कार्य किया.
  • संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) के क्षेत्रीय कार्यालय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

SEBI प्रमुख की नियुक्ति का महत्व

भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए SEBI प्रमुख की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. SEBI न केवल शेयर बाजार की निगरानी करता है, बल्कि निवेशकों के हितों की रक्षा करने और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की भी जिम्मेदारी निभाता है. तुहिन कांत पांडे के पास व्यापक वित्तीय और प्रशासनिक अनुभव है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वह SEBI को और अधिक सशक्त बनाएंगे और भारतीय शेयर बाजार को नए स्तर पर ले जाएंगे.

उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उनके नेतृत्व में SEBI की नीतियों में और अधिक पारदर्शिता और मजबूती आने की संभावना है.