दुनियाभर में वर्कप्लेस यानी कार्यस्थल चुपचाप लेकिन तेजी से बदल रहा है. पहले जो नौकरियां लोगों को पहचान, स्थिरता और रोज़गार देती थीं, वह अब धीरे-धीरे गायब हो रही हैं. न तो कोई बड़ा ऐलान हो रहा है, और न ही कोई ब्रेकिंग न्यूज़, लेकिन हकीकत यह है, कि हायरिंग पैटर्न (Hiring Pattern), ऑफिस का ढांचा और इंडस्ट्री की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कई पारंपरिक नौकरियों की मांग अब तेजी से घट रही है. यह बदलाव सिर्फ कुछ समय के लिए नहीं है, बल्कि इसे तकनीक, ऑटोमेशन (Automation) और अधिक तेज़ एवं कुशल सिस्टम की जरूरतों ने स्थायी रूप से प्रभावित किया है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक 170 मिलियन (17 करोड़) नई नौकरियां आएंगी, लेकिन इसके साथ ही 92 मिलियन (9.2 करोड़) पुरानी नौकरियां खत्म भी हो जाएंगी. यानी बदलाव असमान रूप से होगा. कुछ नौकरियां बदलकर टिकेंगी, लेकिन कुछ पूरी तरह खत्म हो जाएंगी.
आइए जानें वे 5 नौकरियां जो धीरे-धीरे जॉब मार्केट से गायब हो रही हैं:
पोस्टल सर्विस क्लर्क्स (Postal Service Clerks)
डिजिटल संचार, ऑनलाइन बिलिंग और ई-गवर्नेंस के दौर में पारंपरिक डाक सेवाओं की जरूरत कम होती जा रही है. अब सिर्फ पार्सल हैंडलिंग का काम बचा है, जिसे निजी कंपनियां संभाल रही हैं. इस क्षेत्र में 2030 तक 26% की गिरावट का अनुमान है.
बैंक टेलर्स और क्लर्क्स (Bank Tellers and Clerks)
डिजिटल बैंकिंग के आने से बैंक टेलर जैसी ब्रांच-आधारित नौकरियां अब जरूरी नहीं रह गई हैं.
अब मोबाइल ऐप (Mobile Apps), एटीएम (ATMs) और एआई चैटबॉट (AI Chatbots) ने इनका स्थान ले लिया है. इस क्षेत्र में 2030 तक 20% की कमी का अनुमान है.
डाटा एंट्री क्लर्क्स (Data Entry Clerks)
अब डेटा को मैन्युअली भरने की जरूरत नहीं बची है. एआई और ओसीआर टेक्नोलॉजी (OCR Technology) अब यह काम खुद कर रही हैं. इस जॉब में 2030 तक 24% की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है.
कैशियर और टिकट क्लर्क्स (Cashiers And Ticket Clerks)
अब सुपरमार्केट (Supermarkets), थिएटर (Theatres), रेलवे (Railways) और एयरपोर्ट (Airports) पर सेल्फ-चेकआउट (Self-Checkout) और ऑनलाइन बुकिंग ने इनकी जगह ले ली है. इस जॉब में 2030 तक 13% की गिरावट का अनुमान है.
एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट्स और एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी (Administrative Assistants And Executive Secretaries)
अब शेड्यूल बनाना (Creating Schedules), ईमेल भेजना (Sending Emails), नोट्स लेना जैसे काम गूगल वर्कस्पेस (Google Workspace) और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स (Microsoft Teams) जैसे टूल्स कर रहे हैं. इस क्षेत्र में 2030 तक 13% की कमी का अनुमान है.
क्या मतलब है इस बदलाव का?
यह बदलाव आर्थिक संकट या छंटनी से नहीं बल्कि ऑपरेशनल शिफ्ट (Operational Shift) और टेक्नोलॉजी के विकास से आ रहा है. आज स्थिर नौकरी वही है, जिसमें इंसान टेक-फ्रेंडली (Tech-Friendly) हो, मल्टीटास्किंग (Multitasking) कर सके और बदलावों के साथ खुद को ढाल सके.
इन पांच जॉब्स में एक जैसी बात यह है, कि यह सभी रिपिटिटिव (Repetitive) और रूटीन टास्क (Routine Tasks) पर आधारित हैं – जिनका काम अब मशीनें ज़्यादा तेज़ और सटीक तरीके से कर रही हैं. अब नौकरियां खत्म इसलिए नहीं हो रही हैं, कि लोग असफल हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि दुनिया उनसे आगे निकल गई है. यह बदलाव भले ही धीरे-धीरे हो रहे हों, लेकिन असर गहरा और स्थायी है. अब वक्त है खुद को नए स्किल्स से तैयार करने का.













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