Maharashtra Government Rule Change: बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने बदले नियम, कई किसान हो सकते है लाभ से वंचित
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मुंबई, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में फसल नुकसान के लिए दी जाने वाली मुआवजे की नीति में बड़ा बदलाव किया है. अब किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर तक ही फसल नुकसान पर आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि पहले यह सीमा तीन हेक्टेयर तक थी.इस निर्णय का असर राज्य के उन हजारों किसानों पर पड़ेगा जिनकी जमीन दो हेक्टेयर से अधिक है. बता दें की पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में काफी ज्यादा बारिश हुई है.

जिसके कारण बड़ी तादाद में किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है. ये भी पढ़े:Nashik Rain Update: नासिक जिले में बेमौसम बारिश और आंधी ने मचाई तबाही, किसानों की फसल बर्बाद, अगले कुछ घंटे जिले के लिए होंगे मुश्किल भरें

बेमौसम बारिश से तबाह हुई फसलें

मई महीने में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और अतिवृष्टि ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया.कई इलाकों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है. इस बीच, सरकार के इस नए निर्णय ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है.

पुराना निर्णय फिर से लागू

साल 2024 में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नुकसान भरपाई की सीमा तीन हेक्टेयर तक बढ़ा दी थी. लेकिन अब सरकार ने उस निर्णय को रद्द करते हुए 27 मार्च 2023 के पुराने नियमों को फिर से लागू कर दिया है, जिसके तहत केवल दो हेक्टेयर तक की ही मदद दी जाएगी.

सरकार का बयान

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि, 'राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप यह बदलाव किया है. हमारा उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों तक मदद पहुंचाना है, इसलिए यह सीमा दो हेक्टेयर तय की गई है.सरकार ने राज्य भर में फसल नुकसान के पंचनामे शुरू कर दिए हैं.मंत्री बावनकुले ने बताया कि अगली कैबिनेट बैठक में राज्य भर के नुकसान का आकलन पेश किया जाएगा, जिसके बाद विस्तृत मदद की घोषणा की जा सकती है. सरकार ने फिलहाल 10,000 रूपए की अंतरिम सहायता देने का भी निर्णय लिया है.

किसानों में नाराजगी

हालांकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय ज्यादा किसानों तक मदद पहुंचाने के लिए है, लेकिन जिन किसानों की भूमि दो हेक्टेयर से अधिक है, उन्हें इस नीति से नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे किसानों में नाराजगी बढ़ने की संभावना है और आगामी समय में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है.