Telangana Tunnel Collapse Latest Update: तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले में शनिवार की सुबह श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) परियोजना की सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद से वहां फंसे आठ लोगों के बचने की संभावना अब कम ही दिखाई देती है, हालांकि इन कर्मियों तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. भारतीय सेना, नौसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों के अथक प्रयासों के बावजूद बचाव अभियान में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना, नौसेना, सिंगरेनी कोलियरीज और अन्य एजेंसियों के 584 कुशल कर्मियों की एक टीम ने केंद्रीय और राज्य आपदा मोचन टीम के साथ मिलकर सात बार सुरंग का निरीक्षण किया है.
टनल में फंसे 8 लोगों के जीवित बचे होने की उम्मीद कम
#Gravitas | A tunnel collapse in Telangana sparks a rescue operation involving rat miners from Uttarakhand. Despite ongoing dewatering efforts, officials say the chances of survival for the eight trapped workers are 'very remote.' @MollyGambhir reports pic.twitter.com/9XsGPmnyBh
— WION (@WIONews) February 24, 2025
‘गैस कटर’ लगातार काम कर रहे
उन्होंने कहा कि धातु की छड़ को काटने के लिए ‘गैस कटर’ लगातार काम कर रहे हैं. सुरंग के अंदर लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों को भी लाया गया, लेकिन पानी की मौजूदगी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाए. इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा कि विधान परिषद के चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग ले रहे मुख्यमंत्री के पास दुर्घटनास्थल पर जाने का समय नहीं है.
बचावकर्मियों के लिए काम कर पाना कठिन
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सड़क एवं भवन मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने दावा किया कि विपक्षी नेता सिरसिला नहीं गए, जहां कालेश्वरम परियोजना के कारण सात लोगों की मौत हो गई थी. मंत्री ने कहा कि उनके दो कैबिनेट सहयोगी बचाव कार्यों की देखरेख के लिए सुरंग स्थल पर मौजूद हैं. मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि सुरंग में फंसे लोगों के जीवित बचे होने की संभावना ‘‘बहुत कम’’ है और उन्हें निकालने में कम से कम तीन से चार दिन लगेंगे, क्योंकि दुर्घटना स्थल कीचड़ और मलबे से भरा है, जिससे बचावकर्मियों के लिए काम कर पाना कठिन हो गया है.
‘रैट माइनर्स’ की टीम भी रेस्क्यू में जुटी
उन्होंने यह भी बताया कि 2023 में उत्तराखंड में सिल्क्यारा बेंड-बरकोट सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने वाले ‘रैट माइनर्स’ की एक टीम एसएलबीसी सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव दलों में शामिल हो गई है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फंसे हुए लोगों को बचाने के प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के साथ सेना तथा नौसेना बचाव अभियान में शामिल हो गई हैं.
'फंसे हुए लोगों के बचने की संभावना कम'
कृष्णा राव ने पीटीआई- से कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो उनके बचने की संभावना बहुत कम है. क्योंकि मैं खुद अंत तक गया था, जो (दुर्घटना स्थल से) लगभग 50 मीटर दूर था. जब हमने तस्वीरें लीं, तो (सुरंग का) अंत दिखाई दे रहा था. और (सुरंग के) 9 मीटर व्यास में से - लगभग 30 फुट, उस 30 फुट में से 25 फुट तक कीचड़ जमा हो गया है.’’
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