टेक जगत में छाई मायूसी: ‘Forever Layoffs’ और AI के बढ़ते चलन से कर्मचारियों का मनोबल न्यूनतम स्तर पर
मार्च 2026 की ग्लासडोर कर्मचारी आत्मविश्वास सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कर्मचारियों का आत्मविश्वास अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. 'फॉरएवर लेऑफ' (लगातार छंटनी) और एआई द्वारा नौकरियों को प्रभावित करने की आशंका ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है.
मुंबई: तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा समय काफी अनिश्चितता भरा है. मार्च 2026 की 'ग्लासडोर एम्प्लॉई कॉन्फिडेंस इंडेक्स' (Glassdoor Employee Confidence Index) रिपोर्ट के अनुसार, आईटी क्षेत्र (IT Workers) में काम करने वाले केवल 47.8% कर्मचारी ही अपने नियोक्ता के भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं. एक साल पहले यह आंकड़ा 55% था. यह गिरावट दर्शाती है कि अमेरिका और वैश्विक टेक बाजार में कर्मचारियों का मनोबल तेजी से गिर रहा है, जो इसे पूरे श्रम बाजार में सबसे तेजी से प्रभावित होने वाला सेक्टर बनाता है. यह भी पढ़ें: Salesforce Layoffs: सेल्सफोर्स ने 1,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, AI 'एजेंटफोर्स' पर फोकस बढ़ाने के लिए की बड़ी छंटनी
'फॉरएवर लेऑफ' और छंटनी का डर
तकनीकी क्षेत्र में अब बड़े स्तर पर एक बार में छंटनी करने के बजाय 'फॉरएवर लेऑफ' (Forever Layoffs) का ट्रेंड बढ़ गया है. इसमें कंपनियां लगातार छोटे-छोटे अंतराल पर कर्मचारियों को निकाल रही हैं, ताकि अधिक चर्चा न हो और परिचालन को सुव्यवस्थित (streamline) किया जा सके. 2026 की शुरुआत से अब तक टेक सेक्टर में 45,000 से अधिक नौकरियां जा चुकी हैं. इनमें से लगभग 20% छंटनी सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के कारण हुई है.
एआई का बढ़ता प्रभाव और बढ़ती चिंता
जेनरेटिव एआई टूल्स के आने से सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और मिड-लेवल मैनेजर्स के बीच करियर सुरक्षा को लेकर डर पैदा हो गया है. अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां अब अपने बजट को सीधे 'एआई-फर्स्ट' मॉडल और डेटा सेंटर के विस्तार पर खर्च कर रही हैं, जिससे पारंपरिक कोडिंग और प्रशासनिक भूमिकाओं की महत्ता कम हो रही है. इस बदलाव ने टेक सेक्टर के उस पुराने दौर को खत्म कर दिया है, जिसे कभी नौकरियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था.
महामारी के बाद का सुधार (Right-sizing)
मौजूदा मंदी को 2020 से 2022 के बीच हुई अत्यधिक भर्ती (over-hiring) का एक 'देरी से आया सुधार' भी माना जा रहा है. महामारी के दौरान डिजिटल मांग को पूरा करने के लिए टेक कंपनियों ने अपनी टीम को दोगुना कर लिया था. अब जैसे-जैसे विकास दर सामान्य हो रही है, निवेशक मार्जिन बढ़ाने के लिए दबाव डाल रहे हैं, जिसके कारण कंपनियां पिछले 18 महीनों से अपने कार्यबल को 'राइट-साइजिंग' (सही आकार देने) के नाम पर कम कर रही हैं. यह भी पढ़ें: Block Layoffs: फिनटेक कंपनी 'ब्लॉक' ने 4,000 से अधिक कर्मचारियों को निकाला; CEO जैक डॉर्सी ने AI को बताया मुख्य कारण
भविष्य की राह: री-स्किलिंग की चुनौती
ग्लासडोर के अर्थशास्त्री डेनियल झाओ के अनुसार, टेक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अभी लंबा कठिन दौर बाकी है. हालांकि कुछ कंपनियां, जैसे एनवीडिया और सर्विस-नाउ, एआई क्रांति के केंद्र में होने के कारण अभी भी अच्छी रेटिंग बनाए हुए हैं, लेकिन बाकी कंपनियां अपने पुराने विभागों को बंद कर रही हैं.
भविष्य अब पूरी तरह 'री-स्किलिंग' पर टिका है. कंपनियां कर्मचारियों को मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे एआई-रेसिस्टेंट भूमिकाओं में प्रशिक्षित करने का वादा तो कर रही हैं, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों को संदेह है कि क्या यह प्रशिक्षण तकनीक के बदलाव की गति का मुकाबला कर पाएगा. फिलहाल, टेक कर्मचारी एक बड़े संरचनात्मक बदलाव (structural shift) के बीच अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.