TCS Nashik Case: मुख्य आरोपी शफी शेख का जेल में साथी कैदियों द्वारा पिटाई का दावा, सुरक्षा की मांग
नासिक स्थित TCS यूनिट में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के आरोपों के मुख्य आरोपी शफी शेख ने जेल में मारपीट का आरोप लगाया है. कोर्ट ने उसे और एक अन्य आरोपी को 18 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है.
नासिक: नासिक (Nashik) स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) (TCS) में यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्म परिवर्तन (Sexual Harassment and Alleged Forced Conversion) मामले के मुख्य आरोपी शफी बीखन शेख (Shafi Bikhan Sheikh) ने नया दावा किया है. न्यायिक हिरासत के दौरान नासिक रोड जेल (Nashik Road Jail) में साथी कैदियों द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने के बाद उसने अदालत से सुरक्षा की मांग की है. यह आरोप तब सामने आया जब शेख और सह-आरोपी रज़ा रफ़ीक मेमन (Raza Rafiq Memon) को एक अन्य मामले में फिर से गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया गया. यह भी पढ़ें: TCS Nashik: यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के आरोपों के बीच टीसीएस नासिक के कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' करने का निर्देश
18 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजे गए आरोपी
अदालत ने दोनों आरोपियों को 18 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है, क्योंकि कंपनी की नासिक यूनिट की कई महिला कर्मचारियों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं. हालांकि, जेल प्रशासन ने अभी तक शेख के मारपीट के आरोपों या किसी मेडिकल जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना
- यौन उत्पीड़न
- महिला का अपमान करने के इरादे से किया गया कृत्य
इस मामले में अब तक कुल नौ केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें एक एचआर मैनेजर और छह पुरुष कर्मचारियों सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
SIT जांच और आंतरिक समीक्षा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. आठ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन पर लंबे समय तक उत्पीड़न किया गया और वरिष्ठ सहकर्मियों द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया.
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इन घटनाओं को "बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक" बताया है. उन्होंने पुष्टि की है कि जवाबदेही तय करने के लिए वरिष्ठ नेतृत्व की देखरेख में आंतरिक समीक्षा चल रही है. इसके साथ ही, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी स्वतंत्र जांच के लिए एक 'फैक्ट-फाइंडिंग' समिति गठित की है. यह भी पढ़ें: TCS Nashik Row: टीसीएस नाशिक यौन उत्पीड़न मामले में एचआर पर शिकायतों की अनदेखी का आरोप, कई कर्मचारी निलंबित और गिरफ्तार
पहचान उजागर न करने की चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे शिकायतकर्ता महिलाओं की पहचान उजागर करने वाला कोई भी कंटेंट साझा न करें. अधिकारियों ने दोहराया कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रकट करना एक दंडनीय अपराध है. फिलहाल, SIT अन्य कड़ियों को जोड़ने के लिए डिजिटल सबूतों और दस्तावेजों की जांच कर रही है.