TCS Nashik Case: टीसीएस नासिक धर्मांतरण और उत्पीड़न मामला, आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश और पूर्व IPS अधिकारी की समिति गठित
टीसीएस नासिक मामला (Photo Credits: ANI)

TCS Nashik Case: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने नासिक केंद्र से जुड़े विवादों के समाधान के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. कंपनी के सीईओ और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने शुक्रवार को एक औपचारिक बयान जारी कर बताया कि कथित धार्मिक धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति (Oversight Committee) बनाई गई है.

स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम करेगी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए टीसीएस ने अपनी आंतरिक जांच को और मजबूत किया है. कंपनी ने केकी मिस्त्री (TCS के स्वतंत्र निदेशक) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है. इस जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बाहरी विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है:  यह भी पढ़े:  TCS Nashik Case: मुख्य आरोपी शफी शेख का जेल में साथी कैदियों द्वारा पिटाई का दावा, सुरक्षा की मांग

  • कानूनी और ऑडिट सहायता: प्रमुख सलाहकार फर्म डेलॉयट (Deloitte) और लॉ फर्म ट्राईलीगल (Trilegal) स्वतंत्र रूप से जांच में सहयोग कर रहे हैं.

  • समिति की भूमिका: यह पैनल आंतरिक जांच के निष्कर्षों की समीक्षा करेगा और उभरने वाली सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा.

आरोपी 'निदा खान' की भूमिका पर स्पष्टीकरण

मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपी निदा खान को एचआर मैनेजर बताए जाने पर के. कृतिवासन ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि निदा खान कंपनी में केवल एक 'प्रोसेस एसोसिएट' के रूप में कार्यरत थी. उनके पास भर्ती (Recruitment) या किसी भी नेतृत्वकारी भूमिका (Leadership Role) की जिम्मेदारी नहीं थी. कंपनी ने यह भी साफ किया कि उन्हें अब तक अपने 'प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरासमेंट' (POSH) ढांचे के तहत इस मामले से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है.

कामकाज और आंतरिक प्रणाली की स्थिति

कंपनी ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि नासिक केंद्र को बंद कर दिया गया है. टीसीएस के अनुसार, नासिक इकाई में परिचालन पूरी तरह सामान्य है और क्लाइंट सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं आया है.

  • कंपनी ने अपनी नैतिकता (Ethics) चैनलों और POSH तंत्र की प्रारंभिक जांच की है, जिसमें अब तक लगाए गए आरोपों जैसी कोई भी शिकायत दर्ज नहीं मिली है.

  • प्रबंधन ने दोहराया कि वह कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या जबरदस्ती के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाता है.

कानूनी अधिकारियों के साथ सहयोग

टीसीएस ने पुष्टि की है कि वह कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ पूरी तरह से सहयोग कर रही है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके. कंपनी ने कर्मचारियों के कल्याण, सुरक्षा और गरिमा को अपनी प्राथमिकता बताया है. यह पूरा मामला वर्तमान में कानूनी और संस्थागत माध्यमों से जांचा जा रहा है, और कंपनी ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने तक वह अपने कर्मचारियों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी.