भोपाल, 28 मई (आईएएनएस): मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल दहेज हत्या मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार, 28 मई को भोपाल स्थित निवास से सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (Retired District Judge) गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) को हिरासत में ले लिया है. यह कार्रवाई उनकी बहू ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की कथित आत्महत्या और दहेज उत्पीड़न के मामले में की गई है.
सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ तड़के ही भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुंची. कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी और आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया था। फिलहाल पूर्व जज के आवास पर ही उनसे पूछताछ की जा रही है. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द; सीबीआई कस्टडी की तैयारी
हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद हुई कार्रवाई
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की यह हिरासत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका को रद्द किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई है. गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई को ट्विशा अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं.
इस घटना के दो दिन बाद ही गिरिबाला सिंह ने भोपाल सत्र न्यायालय में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका के खाते में किए गए पैसों के हस्तांतरण का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दे दी थी.
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों की अनदेखी की
सत्र न्यायालय के फैसले को पलटते हुए, बुधवार को वेकेशन जज देवनारायण मिश्रा ने 17 पृष्ठों का विस्तृत आदेश जारी कर गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द कर दी. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालत मामले के महत्वपूर्ण और संवेदनशील तथ्यों की जांच करने में पूरी तरह विफल रही.
हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि ट्विशा के परिवार द्वारा सौंपे गए बयानों और व्हाट्सएप चैट्स (WhatsApp Chats) से साफ होता है कि प्रताड़ना के आरोप केवल उसके पति समर्थ सिंह तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि इसमें सास गिरिबाला सिंह की भी भूमिका थी. अदालत ने कहा कि इस मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गहन जांच की आवश्यकता है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों के निशान और गर्भपात का दबाव
ट्विशा के मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ द्वारा ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उन पर गर्भपात (Pregnancy Terminate) कराने का भी भारी दबाव बनाया गया था. अदालत ने भी माना कि ट्विशा द्वारा गर्भपात कराया जाना एक स्वीकृत तथ्य है.
इसके अलावा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि मौत का मुख्य कारण फंदे से लटकना (Antemortem Hanging) बताया गया है, लेकिन ट्विशा के शरीर पर छह से सात अन्य चोटों के निशान भी पाए गए हैं. ये चोटें उनके बाएं हाथ, उंगली और सिर पर थीं. एक अनुवर्ती क्वेरी रिपोर्ट में यह भी साफ हो गया कि ये चोटें शव को फंदे से उतारते समय या अस्पताल ले जाते समय नहीं लगी थीं, बल्कि ये घटना से पहले की हैं. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: सीबीआई की FIR में बड़ा खुलासा, 'विदाई' के वक्त पूर्व जज सास गिरीबाला सिंह ने मांगे थे 2 लाख रुपये
क्राइम सीन से छेड़छाड़ की आशंका और जांच में असहयोग
अदालत में सुनवाई के दौरान ट्विशा के पिता के वकील ने एक बेहद गंभीर दलील पेश की. उन्होंने कहा कि आरोपी गिरिबाला सिंह खुद एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं और उन्हें साइबर फॉरेंसिक तथा क्राइम सीन मैनेजमेंट (Crime Scene Management) का लंबा व्यावहारिक अनुभव है. ऐसे में इस बात की प्रबल आशंका है कि उन्होंने अपने कानूनी और तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर साक्ष्यों को मिटाने या क्राइम सीन से छेड़छाड़ करने में किया हो.
मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह ने गुरुवार को आईएएनएस से बात करते हुए इस कार्रवाई की पुष्टि की. उन्होंने बताया, "इस मामले में कल उच्च न्यायालय में विस्तृत सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने माना कि मृतका के शरीर पर पाई गई सात चोटें मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं. इसके अलावा, जांच टीम द्वारा गिरिबाला सिंह को कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उनकी तरफ से जांच में आवश्यक सहयोग नहीं दिया जा रहा था." इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सीबीआई ने यह कदम उठाया है.













QuickLY