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Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द; सीबीआई कस्टडी की तैयारी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल के बहुचर्चित ट्विषा शर्मा दहेज हत्या मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह रद्द कर दिया है. अदालत ने पाया कि सत्र न्यायालय ने केस डायरी, गवाहों के बयानों और व्हाट्सएप चैट जैसे महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर जमानत दी थी. जमानत रद्द होने के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पूर्व जज को हिरासत में लेने का रास्ता साफ हो गया है.

Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द; सीबीआई कस्टडी की तैयारी
ट्विशा शर्मा मौत मामला (Photo Credits: File Image)

भोपाल/जबलपुर, 28 मई: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कानून और न्यायिक निष्पक्षता से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) (जबलपुर पीठ) ने बुधवार को पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) को उनकी बहू ट्विषा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और दहेज उत्पीड़न के मामले में मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है. हाई कोर्ट ने भोपाल की सत्र अदालत (सेशंस कोर्ट) द्वारा बीते 15 मई को जारी उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत गिरिबाला सिंह को उनके न्यायिक सेवा के इतिहास और उम्र का हवाला देकर राहत दी गई थी. उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला गंभीर खामियों से ग्रस्त था और उसने मामले से जुड़े कई संवेदनशील और प्रत्यक्ष साक्ष्यों को पूरी तरह नजरअंदाज किया था. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: सीबीआई की FIR में बड़ा खुलासा, 'विदाई' के वक्त पूर्व जज सास गिरीबाला सिंह ने मांगे थे 2 लाख रुपये

केस डायरी और व्हाट्सएप चैट जैसे पुख्ता सबूतों की हुई अनदेखी

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश देवनारायण मिश्रा ने मामले की समीक्षा करते हुए भोपाल सेशंस कोर्ट के फैसले को पलटा. जस्टिस मिश्रा ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि निचली अदालत जमानत अर्जी पर विचार करते समय केस डायरी में दर्ज गवाहों के महत्वपूर्ण बयानों, डाक्यूमेंट्री एविडेंस और सबसे महत्वपूर्ण— मृतका व आरोपियों के बीच हुए व्हाट्सएप संवादों (WhatsApp Conversations) का पर्याप्त व सावधानीपूर्वक परीक्षण करने में विफल रही थी.

हाई कोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दहेज हत्या जैसे जघन्य और संवेदनशील सामाजिक अपराधों में अग्रिम जमानत बहुत ही असाधारण और फूंक-फूंक कर कदम उठाने जैसी परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए. पूर्व जिला जज होने के नाते गिरिबाला सिंह की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को राहत का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि कानून के समक्ष हर नागरिक समान है.

घरेलू क्रूरता, मारपीट और जबरन गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप

यह पूरा मामला भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स (Katara Hills) स्थित पूर्व जज के पारिवारिक निवास में घटित हुआ था, जहां गिरिबाला सिंह की बहू ट्विषा शर्मा की दुखद मौत हो गई थी. जांच के दौरान मृतका के परिवार की ओर से पूर्व जज, उनके बेटे समर्थ सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों पर शादी के तुरंत बाद से ही भारी दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे.

अभियोजन पक्ष और जांच दल के अनुसार, इस मामले में केवल दहेज उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि मृतका के साथ गंभीर घरेलू क्रूरता, बेरहमी से मारपीट करने और एक बार उसका जबरन गर्भपात (Forced Termination of Pregnancy) कराने जैसे रोंगटे खड़े कर देने वाले इनपुट्स भी सामने आए हैं.  इन प्रताड़नाओं से तंग आकर ही ट्विषा ने अंततः दम तोड़ दिया. अभियोजन ने कोर्ट में मजबूती से तर्क दिया कि गिरिबाला सिंह ने स्वयं एक न्यायिक पृष्ठभूमि से होने के बावजूद अपनी बहू के खिलाफ जारी इस क्रूरता को न केवल बढ़ावा दिया, बल्कि उसमें सक्रिय भूमिका भी निभाई.

बेटे की सीबीआई रिमांड कल तक; अब पूर्व जज की गिरफ्तारी तय

इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी कमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी. मामले में पूर्व जज का बेटा और मृतका का पति समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई की हिरासत में है और कोर्ट ने उसकी रिमांड अवधि 29 मई तक तय की हुई है.

अब हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई अब किसी भी समय उन्हें कस्टडी में लेकर अपनी पूछताछ का दायरा बढ़ा सकती है. कस्टोडियल इंटरोगेशन (हिरासत में पूछताछ) के जरिए सीबीआई इस मौत के पीछे छिपे कई अन्य अहम राज और दस्तावेजों को खंगालने का प्रयास करेगी. इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराध के मामलों में पद, प्रतिष्ठा या पूर्व प्रशासनिक सेवा के आधार पर किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट या रियायत नहीं दी जा सकती.

(The above story first appeared on LatestLY on May 28, 2026 08:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).