दुनियाभर में भारतीय मसालों की जबरदस्त मांग, हल्दी-अदरक और केसर के निर्यात में 192% की वृद्धि

बीते कुछ साल में दुनियाभर में भारतीय मसालों की महक तेजी से बिखरी है. दरअसल भारतीय मसालों के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2013 में जहां अदरक, केसर और हल्दी का निर्यात 260 करोड़ रुपए था वहीं अब यह 761 करोड़ रुपए की मार्केट का आकार ले चुका है

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits Pixabay)

बीते कुछ साल में दुनियाभर में भारतीय मसालों की महक तेजी से बिखरी है. दरअसल भारतीय मसालों के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2013 में जहां अदरक, केसर और हल्दी का निर्यात 260 करोड़ रुपए था वहीं अब यह 761 करोड़ रुपए की मार्केट का आकार ले चुका है.  इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारतीय मसालों के निर्यात में कितनी तेजी आई है. यह भी पढ़े: तेजपत्ता सिर्फ एक मसाला ही नहीं, बल्कि इसमें छुपा है सेहत का खजाना, जानें इसके कमाल के फायदे

केंद्र सरकार के सफल प्रयास

साल 2014 में पीएम मोदी द्वारा केंद्र की सत्ता संभालने के साथ ही देश के अन्नदाताओं के कल्याण के लिए काम होने लगा. किसानों के लिए भारत सरकार तमाम योजनाएं लेकर आईं जिनका असर अब दिखने लगा है. खेती से जुड़े लोगों का जीवन बेहतर हो, इसके लिए पीएम मोदी निरंतर काम कर रहे हैं.

कारोबार में हुई बढ़ोतरी

दरअसल, पीएम मोदी ने यह लक्ष्य तय किया है किसानों की आय को दोगुनी करना है. इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए भारत सरकार पीएम मोदी के नेतृत्व में एक के बाद एक योजनाएं बनाकर उसे धरातल पर उतार रही है. इन योजनाओं का असर अब भारतीय मसाला कारोबार में भी दिखाई पड़ने लगा है.

हल्दी, अदरक और केसर के निर्यात में करीब 192 प्रतिशत की वृद्धि

केंद्र सरकार की सुचारू और संगठित नीति के कारण भारतीय मसालों की मांग विश्व भर में बढ़ी है और निर्यात में जबरदस्त उछाल आया है. पीएम मोदी के आठ साल के कार्यकाल में हल्दी, अदरक और केसर के निर्यात में करीब 192 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अप्रैल-मई 2013 में इन तीनों मसालों का निर्यात जहां 260 करोड़ रुपए का हुआ करता था वहीं अप्रैल-मई 2022 में यह बढ़कर 761 करोड़ रुपए हो गया है.

भारतीय मसालों का उपयोग

मसाला उन कृषि उत्पादों में आता है जिनके उपयोग से भोजन को सुगंधित और स्वादिष्ट, बनाया जाता है. भारत में पाई जाने वाली गुणवत्ता पूर्वक मिट्टी में सभी प्रकार के मसालों की खेती होती है। भारत में उगाए गए मसालों का स्वाद भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. इनके अद्भुत स्वाद और सुगंध की वजह से भारत में मसालों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक देश

बीते वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल मसाला निर्यात में 40 फीसदी से अधिक और मूल्य के आधार पर 29 फीसदी हिस्सेदारी है. निर्यात में हल्दी की मात्रा के आधार पर 11 फीसदी और मूल्य के आधार पर 6 फीसदी की हिस्सेदारी है। भारत से 1,36,000 टन हल्दी का निर्यात होता है, जिसका मूल्य 1216.40 करोड़ रुपए है.

कोविड के समय काफी लोकप्रिय हुई हल्दी

हल्दी अपनी प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले गुणों की वजह से महामारी के दौर में काफी लोकप्रिय हुई है। इस वजह से उसकी निर्यात मांग भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही के दौरान मात्रा के आधार पर निर्यात में 42 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह मसाला की खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत ही कारगार साबित हो रही है.

किसानों को मिला फायदा

इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है. कोविड महामारी के दौरान हल्दी और काली मिर्च आदि का उपयोग करके बनाया जाने वाला सुनहरा दूध इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सबसे अधिक खोजे जाने वाले व्यंजनों में शामिल हुआ.

औषधीय गुणों से भरपूर

हमारे दैनिक जीवन में हल्दी का महत्वपूर्ण स्थान है। हल्दी मसाले वाली फसल है, इसका उपयोग हमारे देश में अनेक रूपों में किया जाता है। औषधीय गुण होने के कारण इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में, पेट दर्द व ऐंटिसेप्टिक व चर्म रोगों के उपचार में किया जाता है। यह रक्त शोधक होती है. कच्ची हल्दी चोट सूजन को ठीक करने का काम भी करती है. इसके रस का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन में भी किया जाता है. प्राकृतिक एवं खाद्य रंग बनाने में भी हल्दी का उपयोग होता है.

उल्लेखनीय है कि भारत में हल्दी की खेती प्राचीन काल से ही की जा रही है। ऐसे में किसान इसकी खेती कम खर्च में करके अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। विश्व में हल्दी के उत्पादन में भारत का मुख्य स्थान रहा है जिस कारण से इसका निर्यात भी किया जाता है। देश के सभी राज्यों में इसकी खेती होती है, दक्षिण भारत और उड़ीसा में इसका उत्पादन मुख्य रूप से होता है. देश में स्थित विभिन्न अनुसंधान केंद्रों के द्वारा अधिक उपज देने वाली रोग-रोधी किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें रोमा, सुरमा, रंगा, रश्मि, पीतांबरा, कोयम्बटूर, सुवर्णा, सुगना, शिलांग, कृष्णा, गुन्टूर एवं मेघा आदि किस्में प्रमुख हैं.

बताना चाहेंगे कि भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में मसाला उद्योग क्षेत्र के निर्यात को दोगुना करके 10 बिलियन अमरीकी डॉलर करने का लक्ष्य तय किया है। यानि 2027 तक 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने की आकांक्षा के साथ भारतीय मसाला बाजार में आगामी दिनों में और अधिक तेजी देखने को मिल सकती है.

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