Srinagar Weather Update: श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी में मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से शनिवार शाम तक हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान जताया गया है, जिसके चलते नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.
तापमान और तात्कालिक पूर्वानुमान
श्रीनगर में आज अधिकतम तापमान 18°C और न्यूनतम तापमान 7°C के आसपास रहने की उम्मीद है. हालांकि सुबह के समय आसमान साफ रह सकता है, लेकिन दोपहर बाद बादलों की आवाजाही बढ़ने और शाम तक बारिश होने की प्रबल संभावना है. मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी है.
प्रशासन की ओर से महत्वपूर्ण एडवाइजरी
बदलते मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक एहतियाती एडवाइजरी जारी की है. इसमें लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान घरों के अंदर रहने की अपील की गई है. विशेष रूप से पर्यटकों, शिकारा संचालकों और डल झील व झेलम नदी के पास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र और पुलिस नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है.
संभावित खतरे और बुनियादी ढांचा
मौसम अधिकारियों के अनुसार, 4 अप्रैल को होने वाली बारिश और गरज-चमक के कारण निचले इलाकों में जलभराव, अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) और पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ सकता है. तेज हवाओं के कारण पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है. प्रशासन ने सार्वजनिक सहयोग की अपील की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके.
आने वाले दिनों का हाल
मौसम विभाग के अनुसार, 5 और 6 अप्रैल को मौसम में मामूली सुधार हो सकता है, लेकिन 7 से 9 अप्रैल के बीच एक बार फिर बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू होने की संभावना है. इसके बाद 12 से 15 अप्रैल तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है.
कृषि और जल स्तर पर प्रभाव
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में मार्च के महीने में सामान्य से 34 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी. ऐसे में अप्रैल की यह बारिश कृषि के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, हालांकि साथ ही यह सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी पेश कर रही है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही अपनी फसलों की देखभाल और छिड़काव का कार्य करें.













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