जब अमेरिका ने बंद किए रास्ते, तो रूस ने थामा भारत का हाथ, भारतीय सामान के लिए पुतिन ने खोले अपने बाजार के दरवाजे
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारतीय सामान पर भारी टैरिफ लगा दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. इसके जवाब में रूस ने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए मदद की पेशकश की है. रूस ने कहा है कि अगर अमेरिकी बाजार में दिक्कत है तो भारतीय सामान का रूसी बाजार में स्वागत है.
आजकल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत एक अहम मोड़ पर खड़ा है. एक तरफ अमेरिका जैसा पुराना साथी है, तो दूसरी तरफ रूस जैसा भरोसेमंद दोस्त. हाल ही में एक ऐसी घटना हुई है जिसने इन रिश्तों को और भी दिलचस्प बना दिया है. अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. ऐसे में रूस ने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए एक बड़ा ऑफर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला शुरू हुआ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से. अमेरिका और पश्चिमी देश चाहते हैं कि रूस पर दबाव बनाने के लिए दुनिया के सभी देश उससे व्यापार, खासकर तेल खरीदना बंद कर दें. लेकिन भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है. भारत का कहना है कि वह अपने देश के हितों को देखकर फैसले लेगा.
भारत के इस कदम से नाराज़ होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया. इसका मतलब यह है कि भारत से जो भी सामान अमेरिका जाएगा, वह वहाँ और महंगा हो जाएगा, जिससे उसकी बिक्री कम हो सकती है. इसका सीधा असर भारत के कपड़ा, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे उद्योगों पर पड़ने की आशंका है.
रूस का बड़ा ऑफर: "हमारे दरवाज़े आपके लिए खुले हैं"
अमेरिका के इस कदम के जवाब में रूस खुलकर भारत के समर्थन में आ गया है. भारत में रूस के एक वरिष्ठ राजनयिक, रोमन बाबुश्किन ने कहा, "अगर भारतीय सामान को अमेरिकी बाज़ार में घुसने में मुश्किल हो रही है, तो रूसी बाज़ार भारतीय निर्यात का स्वागत करने के लिए तैयार है."
उनका संदेश साफ़ था: अगर एक दरवाज़ा बंद होता है, तो हम दूसरा दरवाज़ा आपके लिए खोल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का भारत पर दबाव डालना "अनुचित" और "एकतरफा" है.
रूस ने अमेरिका की आलोचना कैसे की?
रूसी राजनयिक ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कई बड़ी बातें कहीं:
- दोस्त ऐसा नहीं करते: उन्होंने कहा कि दोस्त इस तरह का बर्ताव नहीं करते. दबाव डालना, ब्लैकमेल करना और दूसरे देशों के हितों का सम्मान न करना दोस्तों का काम नहीं है.
- पश्चिम का नव-औपनिवेशिक रवैया: उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश नव-औपनिवेशिक शक्तियों की तरह बर्ताव करते हैं जो सिर्फ़ अपने फ़ायदे के बारे में सोचते हैं.
- प्रतिबंध उन्हीं पर भारी पड़ते हैं जो लगाते हैं: उनका मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध अंत में खुद उसी को नुकसान पहुँचाते हैं.
- अवैध प्रतिबंध: रूस का कहना है कि सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध ही कानूनी होते हैं. किसी एक देश का दूसरे पर प्रतिबंध लगाना अर्थव्यवस्था को हथियार की तरह इस्तेमाल करना है, जो कि अवैध है.
भारत-रूस के रिश्ते कितने मज़बूत हैं?
रूस ने इस मौके पर भारत के साथ अपने गहरे रिश्तों की भी याद दिलाई.
- सबसे बड़ा तेल सप्लायर: रूस आज भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है.
- 7 गुना बढ़ा व्यापार: तमाम प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद, पिछले कुछ सालों में भारत और रूस के बीच व्यापार 7 गुना बढ़ा है.
- उच्च स्तरीय बातचीत: हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके यूक्रेन के हालात की जानकारी दी थी. यह दिखाता है कि रूस भारत को कितना महत्व देता है.
भारत का क्या कहना है?
भारत ने अमेरिका के इस कदम की निंदा की है. भारत सरकार ने इसे "अनुचित, अन्यायपूर्ण और तर्कहीन" बताया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साफ कर दिया है कि भारत किसी भी तरह के आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा.
आगे क्या हो सकता है?
यह स्थिति एक तरह की कूटनीतिक शतरंज की बिसात जैसी है. अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाकर रूस पर दबाव बनाना चाहता है. वहीं, रूस भारत को एक वैकल्पिक बाज़ार और मज़बूत साझेदारी का भरोसा देकर इस दबाव को कम करने की कोशिश कर रहा है.
भारत के लिए यह एक चुनौती भी है और एक अवसर भी. चुनौती यह है कि अमेरिका जैसे बड़े व्यापारिक भागीदार के साथ रिश्तों में संतुलन कैसे बनाया जाए. और अवसर यह है कि रूस और ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) जैसे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत किया जाए, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो. आने वाला समय ही बताएगा कि भारत इस कूटनीतिक चक्रव्यूह से कैसे निकलता है.