प्रयागराज: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और शिष्य मुकुंदानंद को राहत; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में मंजूर की अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कथित यौन उत्पीड़न और पॉक्सो मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने 27 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार, 25 मार्च को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को कथित यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है. न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया. दोनों ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने इससे पहले 27 फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. यह भी पढ़ें: Kedarnath Temple Cannot Be Made in Delhi: दिल्ली में केदारनाथ मंदिर के निर्माण पर भड़के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य, बोले- ये गलत है
मामले की पृष्ठभूमि और FIR
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब एडीजे (रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के निर्देशों के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी. यह आदेश स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा धारा 173(4) के तहत दायर एक आवेदन पर दिया गया था. शिकायत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिन्हें संतों ने शुरू से ही सिरे से खारिज किया है.
कोर्ट का रुख और सुनवाई
27 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने शंकराचार्य और उनके शिष्य प्रत्यक्षचैतन्य मुकुंदानंद गिरी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. बुधवार को आए अंतिम फैसले में अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत ने मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद यह राहत दी है.
शंकराचार्य की प्रतिक्रिया: 'सत्य की जीत'
अग्रिम जमानत मिलने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने दोहराया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं.
उन्होंने कहा, 'हमारे वकील ने सूचित किया है कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हमारी अपील को सही पाया है। हम शुरू से ही कह रहे थे कि यह मामला हमें फंसाने के लिए बनाया गया है. न्यायाधीश ने हमारी दलीलों में दम पाया और यह फैसला सुनाया. यह आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि अदालत भी मानती है कि यह मामला झूठा है.' यह भी पढ़ें: सबूत सामने लाएं... केदारनाथ में सोना चोरी के दावे पर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने शंकराचार्य पर किया पलटवार
न्यायपालिका पर जताया भरोसा
शंकराचार्य ने आगे कहा कि उन्हें हमेशा न्याय की उम्मीद थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'आजकल के हालातों में भरोसा करना एक जोखिम भरा काम हो गया है, लेकिन हमें विश्वास था कि न्यायपालिका निष्पक्ष होकर सत्य की लड़ाई लड़ेगी। हम अपनी बात बेंच के सामने रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे.'
फिलहाल, हाई कोर्ट के इस आदेश से दोनों संतों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। पुलिस अब कोर्ट के निर्देशों के अधीन मामले की आगे की जांच जारी रखेगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 25, 2026 07:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

