Will Harivansh Become The Next VP: क्या हरिवंश नारायण सिंह बनेंगे देश के अगले उपराष्ट्रपति? राष्ट्रपति  मुर्मू से मुलाकात के बाद अटकलें तेज
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Will Harivansh Become The Next VP: आज दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के बीच हुई एक मुलाकात ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है. मामला कुछ यूं है कि मंगलवार 22 जुलाई को दोपहर करीब 11 बजे राष्ट्रपति भवन में हरिवंश और राष्ट्रपति मुर्मू आमने-सामने हुए. इस मुलाकात में फूलों का आदान-प्रदान हुआ और काफी गर्मजोशी देखी गई. हालांकि, आधिकारिक रूप से इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन देश की राजनीति में इस वक्त कोई मुलाकात महज औपचारिक नहीं मानी जाती. खासकर तब जब उपराष्ट्रपति का पद खाली हो चुका हो.

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राष्ट्रपति भवन में हरिवंश से मिलीं प्रेसिडेंट मुर्मू

क्या NDA हरिवंश को अपना कैंडिडेट बनाएगी?

जी हां, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, वो भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर. लेकिन विपक्ष का कहना है कि मामला सिर्फ तबीयत का नहीं है. इसके पीछे कुछ और भी हो सकता है. अब इस सबके बीच हरिवंश की राष्ट्रपति से मुलाकात को एक सियासी संकेत माना जा रहा है. क्या ये मुलाकात अगले उपराष्ट्रपति पद की चर्चा का हिस्सा थी? क्या एनडीए हरिवंश को ही अपना कैंडिडेट बनाने जा रही है?

विवादों में नहीं रहे हैं हरिवंश नारायण सिंह

हरिवंश नारायण सिंह कोई नया नाम नहीं हैं. वे पत्रकारिता की दुनिया से राजनीति में आए हैं और दो बार राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं. उनका कार्यकाल विवादों से दूर, संतुलित और मर्यादित माना गया है. यही कारण है कि उन्हें राजनीतिक रूप से स्वीकार्य चेहरा भी माना जाता है. ना सिर्फ एनडीए में, बल्कि कुछ हद तक विपक्षी खेमे में भी.

'बिहार मॉडल' पर दांव लगा सकती है BJP

दूसरी तरफ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं और बिहार–झारखंड बेल्ट की राजनीति को अच्छी तरह समझती हैं. हरिवंश भी बिहार से आते हैं. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि एनडीए एक बार फिर "बिहार मॉडल" पर दांव लगा सकता है. यानी एक संतुलित, साफ-सुथरी छवि वाले नेता को उपराष्ट्रपति बनाकर सियासी संदेश देना.

क्या हरिवंश बनेंगे अगला उपराष्ट्रपति?

सोशल मीडिया पर भी यह सवाल ट्रेंड कर रहा है, क्या हरिवंश बनेंगे अगला उपराष्ट्रपति? कुछ यूज़र्स ने इसे "साइलेंट गेमचेंजर मूव" बताया है. हालांकि, बीजेपी या एनडीए की ओर से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से घटनाएं घट रही हैं, उससे संकेत साफ हैं, हरिवंश इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं.

अब देखने वाली बात ये है कि क्या यह मुलाकात एक ‘संकेत’ थी या फिर आने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव की ‘शुरुआत’?