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Old Pension Scheme: महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना की जोरदार मांग, अब क्या करेगी नकदी संकट से जूझ रही शिंदे सरकार?

विभिन्न कर्मचारी संगठन पूरे महाराष्ट्र में मार्च और विरोध के रूप में सरकार पर दबाव बना रहे हैं, ताकि 2005 में बंद की गई ओपीएस को फिर से शुरू करने लिए मजबूर किया जा सके.

Old Pension Scheme: महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना की जोरदार मांग, अब क्या करेगी नकदी संकट से जूझ रही शिंदे सरकार?
सीएम एकनाथ शिंदे व देवेंद्र फडणवीस (Photo Credits PTI)

मुंबई, 6 मार्च:  राज्य के बजट से पहले महाराष्ट्र में 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जो सत्तारूढ़ शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को कड़ी चुनौती दे रही है. विभिन्न कर्मचारी संगठन पूरे महाराष्ट्र में मार्च और विरोध के रूप में सरकार पर दबाव बना रहे हैं, ताकि 2005 में बंद की गई ओपीएस को फिर से शुरू करने लिए मजबूर किया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम पांच राज्यों राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पंजाब ने पिछले महीने ओपीएस पर वापस लौटने की अपनी योजना की घोषणा है.

अगर सत्तारूढ़ गठबंधन मांग को स्वीकार करने में विफल रहता है और आगामी बजट 2023-24 में इसकी घोषणा नहीं करता है, तो सरकार कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन (आरएसकेएमएस) के बैनर तले विभिन्न राज्य कर्मचारियों की पांच दर्जन से अधिक यूनियनों ने 14 मार्च से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है.

महाराष्ट्र राज्य जाति कर्मचारी कल्याण महासंघ ने 20 जिलों से होते हुए नागपुर-मुंबई लॉन्ग मार्च शुरू किया है, जो 14 मार्च को महाराष्ट्र विधानमंडल तक पहुंचेगा और एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा. ओपीएस की मांग को कांग्रेस जैसे कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला है, जो विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन कर रहे हैं या भाग ले रहे हैं.

अपनी ओर से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने फरवरी में ओपीएस को वापस लाने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त पैनल की स्थापना की घोषणा की थी और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इस संबंध में सकारात्मक संकेत दिए थे. हालांकि, पहले फडणवीस इसके लिए अनिच्छुक थे क्योंकि इससे नकदी की तंगी वाली सरकार पर 1.10 लाख करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ेगा और पांच साल बाद समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं.

संयोग से, जनवरी में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने राज्यों को डीए से जुड़े ओपीएस पर वापस लौटने के लिए आगाह किया था जो 2004 तक अस्तित्व में था क्योंकि यह आने वाले वर्षों में राज्यों के वित्तीय बोझ को बढ़ाएगा.

ओपीएस ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को उनके अंतिम आहरित वेतन का 50 प्रतिशत मासिक पेंशन के रूप में प्राप्त करने का अधिकार दिया है, जो डीए में वृद्धि के साथ बढ़ता रहता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता रहता है, इसलिए इसे अव्यवहार्य माना जाता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 06, 2023 07:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).