VIDEO: 'कर्नाटक सरकार में संस्कृति मंत्री हैं, लेकिन कन्नड़ भाषा नहीं जानते', सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए मिनिस्टर Shivaraj Tangadagi, बीजेपी ने भी साधा निशाना
कर्नाटक के संस्कृति मंत्री शिवराज तंगडगी (Shivaraj Tangadagi) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान कन्नड़ लिखने में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं.
Minister Shivraj Tangadgi Viral Video: कर्नाटक के संस्कृति मंत्री शिवराज तंगडगी (Shivaraj Tangadagi) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान कन्नड़ लिखने में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्री शिवराज तंगडगी कॉप्पल जिले के करटगी में एक आंगनवाड़ी भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शुभकामना स्वरूप कन्नड़ में "शुभवागली" (Best of Luck)'' लिखने की कोशिश की, लेकिन कई बार असफल रहे. यह देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए.
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा. एक यूजर ने लिखा, "जब खुद मंत्री ही कन्नड़ नहीं लिख सकते तो वे भाषा संरक्षण की बात कैसे करेंगे?"
ट्रोल हुए संस्कृति मंत्री शिवराज तंगडगी
बीजेपी ने भी कसा तंज
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
अब इस वायरल वीडियो को लेकर विपक्षी बीजेपी ने राज्य की कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिया. बीजेपी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''कन्नड़ भाषा को कन्नरामैया सरकार (कांग्रेस सरकार) दबा रही है. पहले शिक्षा मंत्री मदु बंगारप्पा को कन्नड़ पढ़नी-लिखनी नहीं आती और अब संस्कृति मंत्री भी कन्नड़ लिखने में असमर्थ हैं. इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस सरकार कर्नाटक से कन्नड़ को खत्म करना चाहती है.
कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नीतियों से कन्नड़ भाषा को नुकसान पहुंच रहा है. शिक्षा मंत्री और संस्कृति मंत्री को खुद कन्नड़ नहीं आती, तो वे राज्य में भाषा को कैसे बढ़ावा देंगे? कन्नड़ व्याकरण की गलतियां लगातार केपीएससी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में दोहराई जा रही हैं. राज्य में कन्नड़ स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जिससे भाषा पर संकट खड़ा हो रहा है.
क्या कहती है सरकार?
हालांकि, इस पूरे विवाद पर कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन यह मामला राज्य की राजनीति में एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है और आने वाले दिनों में इसे लेकर और घमासान मच सकता है.