Bihar Elections 2020: शिवसेना और NCP अब बिहार चुनाव में दिखाएगी दमखम, महाराष्ट्र की दिग्गज पार्टियों के आने से किस के वोटरों में लगेगी सेंध?
उद्धव ठाकरे और शरद पवार (Photo Credits: PTI)

पटना: बिहार (Bihar) विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों की तैयारियां जोरो पर है. इस बीच महाराष्ट्र (Maharashtra) की दो दिग्गज पार्टियां शिवसेना (Shiv Sena) और एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) भी बिहार चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने का मूड बना चुकी है. शिवसेना बिहार में 50 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है  जबकि एनसीपी (NCP) ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है. एनसीपी कितने और कौन सी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, इसकी जानकारी नहीं दी है. हालांकि महाराष्ट्र में एक साथ सरकार चला रही शिवसेना और एनसीपी बिहार में अपने-अपने दम पर अकेले ही चुनावी रण में उतरने वाली है. दोनों दल बिहार में किसी के साथ भी गठबंधन नहीं करेंगे. बिहार चुनावों के लिए मोदी, शाह, राहुल, नीतीश, उद्धव ठाकरे के नाम स्टार प्रचारकों के रूप में दिये गये

कुछ दिन पहले ही शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने बताया था कि उनकी पार्टी बिहार में करीब 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बिहार में हमारे लोग 50 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. हम कह रहे हैं कि हमें 30-40 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए. वहीं, एनसीपी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि बिहार में एनसीपी कांग्रेस और आरजेडी के साथ गठबंधन करन चाहती थी, लेकिन सीटों को लेकर बात नहीं बन सकी.

शिवसेना और एनसीपी ने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है. बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए प्रचारकों के तौर पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) समेत कई दिग्गजों के नाम दिये गये हैं. Bihar Assembly Elections 2020: बीजेपी आज दोबारा होगी चुनाव समिति की बैठक, फिर जारी होगी बिहार की तीसरी लिस्ट

इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह दोनों पार्टियां चुनावों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है? किसके वोट बैंक में सेंधमारी होगी? हालांकि इसका जवाब देना थोड़ा मुश्किल है. क्योकि बिहार विधानसभा चुनाव में दोनों दल के आने से किसी भी प्रकार के सियासी हलचल की उम्मीद बहुत कम है. पिछले चुनावों में भी शिवसेना और एनसीपी का प्रदर्शन ख़राब रहा है. दोनों दलों के खाते में एक भी सीट नहीं आई है.

साल 2015 में हुए बिहार विधानसभा में शिवसेना को महज 211,131 वोट मिले थे, तब वोट प्रतिशत केवल 0.6 फीसदी ही था. जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पक्ष में 0.5 फीसदी वोट पड़े थे. तब एनसीपी को शिवसेना से भी कम कुल 185,437 वोट प्राप्त हुए थे. दोनों ही दल एक भी सीट नहीं जीत सके. ऐसा ही हाल शिवसेना और एनसीपी का साल 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी हुआ था. तब एनसीपी के प्रदर्शन में मामूली सुधर देखा गया था लेकिन तब भी पार्टी एक भी सीट पर कामयाब नहीं हुई थी. 2010 में एनसीपी 171 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसके पक्ष में केवल 1.82% वोट पड़े और वह राज्यभर 5,28,575 मत ही हासिल कर पाई. वहीं शिवसेना ने 31 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जिन्हें कुल 98,698 वोट (0.34%) ही मिले.

उल्लेखनीय है कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन चरणों में होने वाले चुनाव के लिए मतदान 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को होगा जबकि मतगणना 10 नवंबर को होगी. पहले चरण में 28 नवंबर को 71 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा जबकि दूसरे चरण में तीन नवंबर को 94 सीटों के लिए और आखिरी चरण में सात नवंबर को 78 सीटों के लिए मतदान होगा.