Bharat Bandh Today: 'भारत बंद' पर सियासी संग्राम, राहुल गांधी ने मजदूरों और किसानों के आंदोलन को दिया समर्थन; केंद्र पर साधा निशाना
आज देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए 'भारत बंद' को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपना पूरा समर्थन दिया है. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने और किसानों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है.
Bharat Bandh Today: केंद्र सरकार (Union Government) की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ आज, 12 फरवरी 2026 को बुलाए गए राष्ट्रव्यापी 'भारत बंद' (Bharat Bandh) को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) का साथ मिला है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए आंदोलनकारियों का समर्थन करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि वह मजदूरों और किसानों के हक की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं. यह भी पढ़ें: Bharat Bandh Today: ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों की देशव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित होने के आसार, जानें आपके राज्य में स्कूल-कॉलेज और बैंक क्या खुला, क्या बंद
'क्या मोदी जी अब सुनेंगे?': राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने अपने बयान में तीन मुख्य चिंताओं को रेखांकित किया है—नए लेबर कोड, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और मनरेगा (MGNREGA)। उन्होंने लिखा:
'आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं. मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ (Labour Codes) उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी. किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा, और मनरेगा को कमजोर करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है.'
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए सवाल किया, 'जब उनके भविष्य के फैसले लिए गए, तो उनकी आवाज को अनसुना कर दिया गया। क्या मोदी जी अब सुनेंगे? या उन पर किसी की 'पकड़' बहुत मजबूत है?'
राहुल गांधी ने लेबर और इकोनॉमिक पॉलिसी के खिलाफ देशव्यापी बंद को सपोर्ट किया
किसान और ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांगें
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने इस बंद का नेतृत्व किया है. उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- श्रम सुधारों की वापसी: 29 पुराने कानूनों की जगह लाए गए 4 नए लेबर कोड को रद्द करना।
- व्यापार समझौते पर रोक: भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे का विरोध, जिसे किसान अपनी आजीविका के लिए 'सीधा खतरा' बता रहे हैं.
- MGNREGA की सुरक्षा: ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में किए गए बदलावों को वापस लेना.
- न्यूनतम मजदूरी: सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना.
राज्यों में बंद का असर: तमिलनाडु और पंजाब सबसे आगे
- तमिलनाडु: यहां सत्ताधारी पार्टी DMK की ट्रेड यूनियन विंग (WPA) ने बंद का समर्थन किया है, जिससे बैंकिंग और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है.
- पंजाब: आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी बंद को खुला समर्थन दिया है. पार्टी कार्यकर्ताओं ने मजदूरों और किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
- ओडिशा और केरल: यहां भी स्कूल, कॉलेज और बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रहे, जबकि आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया. यह भी पढ़ें: Bharat Bandh: देशव्यापी हड़ताल के चलते 12 फरवरी को भारत रहेगा बंद, जानें क्या कल बैंक, स्कूल, कॉलेज, परिवहन और बाजार बंद रहेंगे या खुले रहेंगे
सरकार का पक्ष
दूसरी ओर, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और सरकार ने पहले ही इन आरोपों को खारिज कर दिया है. सरकार का दावा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी रक्षा की गई है. साथ ही, नए लेबर कोड को श्रमिकों के हित में 'व्यापक सुधार' बताया गया है.