डिब्रूगढ़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को असम के डिब्रूगढ़ जिले (Assam’s Dibrugarh District) में अपने दिन की शुरुआत एक चाय बागान के दौरे के साथ की. इस दौरान उन्होंने चाय की पत्तियां चुनने वाली महिला श्रमिकों से बातचीत की और असमिया चाय (Assamese Tea) के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला. सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने अनुभव साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने चाय को 'असम की आत्मा' (Soul of Assam) बताया और कहा कि यहां की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है. यह भी पढ़ें: PM Modi In Gujarat: पीएम मोदी ने गुजरात के वाव-थराद में 19,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ (Watch Video)
श्रमिकों के साथ यादगार अनुभव
प्रधानमंत्री ने इस दौरे को एक 'यादगार अनुभव' बताया. उन्होंने उन महिला श्रमिकों के योगदान की सराहना की, जो चाय उद्योग की रीढ़ मानी जाती हैं. पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'हमें चाय बागान से जुड़े प्रत्येक परिवार के प्रयासों पर गर्व है. उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ता ने असम के गौरव को बढ़ाया है.'
दौरे की तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने बताया कि चाय की पत्तियां चुनने के बाद महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में चर्चा की और उनके साथ सेल्फी भी ली.
चुनावी अभियान और रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री का यह दौरा असम में उनके चुनावी अभियान का हिस्सा है, जहां वह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कई सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चाय बागान श्रमिकों के साथ उनका यह संवाद रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. असम के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में चाय समुदाय की भूमिका निर्णायक होती है और पीएम की यह पहुंच एक बड़े वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है.
PM मोदी ने डिब्रूगढ़ में चाय बागान का दौरा किया
We are very proud of the efforts of each and every tea garden family. Their hardwork and perseverance have enhanced Assam’s pride.
Here are some more glimpses from a tea garden in Dibrugarh. pic.twitter.com/L7je3s8JnO
— Narendra Modi (@narendramodi) April 1, 2026
पीएम मोदी का चाय से निजी जुड़ाव
चाय के साथ प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत जुड़ाव जगजाहिर है. उन्होंने अक्सर अपने शुरुआती जीवन के बारे में बात की है, जब वह गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेचने में मदद करते थे. यह पृष्ठभूमि उनके राजनीतिक विमर्श का एक प्रमुख हिस्सा रही है, जो उनके साधारण शुरुआत से देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का प्रतीक है.
असम के चाय उद्योग की भूमिका
असम दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और भारत के चाय निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. इस उद्योग में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और जोरहाट जैसे जिलों के चाय बागानों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक है.
प्रधानमंत्री से उम्मीद की जा रही है कि वह अपने राज्यव्यापी अभियान के दौरान विकास, कल्याणकारी योजनाओं और चाय उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार के समर्थन पर अपना ध्यान केंद्रित रखेंगे.












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