भारत के रक्षा बजट में हो सकता है इजाफा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

नई दिल्ली से आई एक अहम खबर के मुताबिक, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी भी पूरी ताकत के साथ जारी है. अगर जरूरत पड़ी तो आगे और बड़ी कार्रवाई भी की जाएगी. इस बयान के बाद अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार अपने रक्षा बजट को और बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

क्या है ऑपरेशन सिंदूर?

7 मई को भारत की सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकियों के 9 ठिकानों को निशाना बनाया. इस एयरस्ट्राइक में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए और कई घायल भी हुए. सेना ने इस बात का खास ध्यान रखा कि किसी भी रिहायशी इलाके या सैन्य ठिकाने को नुकसान न पहुंचे. ये पूरा ऑपरेशन सिर्फ आतंकियों को खत्म करने पर केंद्रित था.

क्यों बढ़ेगा रक्षा बजट?

सरकार का मानना है कि आतंकियों के खिलाफ लड़ाई में तकनीक, हथियार और रिसर्च को मजबूत करना जरूरी है. इसलिए 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट लाने की योजना बनाई गई है. ये पूरक बजट शीतकालीन सत्र में संसद से पास कराया जा सकता है.

इस अतिरिक्त रकम का इस्तेमाल किया जाएगा:

  • आधुनिक हथियार और गोला-बारूद की खरीद में

  • रक्षा से जुड़ी तकनीकों के विकास में

  • सेनाओं की जरूरी खरीद और रिसर्च में

पिछले वर्षों में कितना रहा रक्षा बजट?

साल रक्षा बजट (करोड़ रुपये में)
2014-15 ₹2,29,000
2015-16 ₹2,46,727
2016-17 ₹3,40,921
2017-18 ₹3,59,854
2018-19 ₹4,04,365
2019-20 ₹4,31,011
2020-21 ₹4,71,378
2021-22 ₹4,78,196
2022-23 ₹5,25,166
2023-24 ₹5,93,538
2024-25 ₹6,21,941
2025-26 ₹6,81,210 (वर्तमान)

क्या है इस फैसले का मतलब?

मोदी सरकार के 10 सालों में रक्षा बजट लगभग तीन गुना बढ़ चुका है. मौजूदा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये है, जो कि पूरे देश के बजट का 13.45% हिस्सा है — यानी सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा. इससे साफ है कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सेना को हर जरूरी संसाधन देने के लिए तैयार है.

भारत का संदेश साफ है – आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान न सिर्फ दुश्मनों को सबक सिखा रहे हैं बल्कि यह भी दिखा रहे हैं कि भारत अपनी रक्षा में अब किसी भी स्तर तक जाने के लिए तैयार है.