Ahmedabad Plane Crash: भीषण विमान हादसे से दहला देश, महिला ज्योतिषी ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी
Air India Plane Crash | PTI

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने देश ही नहीं दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. गुरुवार दोपहर अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 एक भयावह हादसे का शिकार हो गई. यह केवल एक तकनीकी दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसी घटना थी जिसे लेकर पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी वह भी किसी वैज्ञानिक रिपोर्ट से नहीं, बल्कि एक महिला ज्योतिषाचार्य की भविष्यवाणी से.

ज्योतिष की दृष्टि से मंगल और केतु का संयोग (युति) एक अत्यंत संवेदनशील और विस्फोटक योग माना जाता है. विशेषकर जब यह युति सिंह राशि में हो, तो इसके दुष्परिणाम और अधिक घातक हो सकते हैं. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य शर्मिष्ठा देवी ने मई 2025 में ही एक वीडियो संदेश के माध्यम से यह चेतावनी दी थी कि “मंगल-केतु की युति से भारत के कुछ हिस्सों में अग्निकांड, वायु दुर्घटनाएं और तकनीकी विफलताएं संभव हैं”.

गुजरात था विशेष रूप से संवेदनशील

शर्मिष्ठा देवी ने अपनी भविष्यवाणी में स्पष्ट रूप से कहा था कि “गुजरात और पश्चिमी भारत में इस युति का प्रभाव सबसे अधिक हो सकता है.” दुर्भाग्यवश, 12 जून को यह बात सत्य साबित हुई जब अहमदाबाद के पास प्लेन क्रैश हुआ, जिसमें कई लोगों की जान गई और देश में शोक की लहर दौड़ गई.

शास्त्रीय प्रमाण: क्या ग्रंथों में भी है इसका संकेत?

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र जैसे पुराने ज्योतिषीय ग्रंथों में भी कहा गया है, "मङ्गलः केतुयुक्ते च यदि सिंहस्थो भविष्यति. भीषणं जनहिंसां च, वह्निक्लेशं सृजेद् ध्रुवम्." इसका अर्थ है कि जब मंगल और केतु सिंह राशि में हों, तब भयानक जनहानि, आगजनी और दहशत फैलाने वाली घटनाएं होने की संभावना प्रबल हो जाती है.

वर्तमान ग्रह स्थिति और भविष्य की चेतावनी

ज्योतिषाचार्य शर्मिष्ठा का मानना है कि यह खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. 20 जून से 5 जुलाई 2025 तक का समय और भी संवेदनशील माना जा रहा है. इस दौरान देश-विदेश में वायुसेवा, मिलिट्री ज़ोन, और भारी उद्योग क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है. उन्होंने आम जनता और प्रशासन को सचेत रहने की सलाह दी है.

जहां एक ओर विज्ञान दुर्घटना के कारणों की जांच कर रहा है, वहीं इस तरह की भविष्यवाणियां यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या हमें प्राचीन ज्योतिषीय चेतावनियों को भी साथ लेकर चलना चाहिए?