Vegetable-Fruit Prices Hike in Mumbai: ईंधन के दाम बढ़ते ही मुंबई में बढ़े फल और सब्जियों के दाम, विक्रेता समेत आम जनता परेशान; जानें लोगों ने क्या कहा; VIDEO
मुंबई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर अब आम आदमी की रसोई पर दिखने लगा है. परिवहन लागत बढ़ने और पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात प्रभावित होने से मुंबई के बाजारों में फल और सब्जियों के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं.
Vegetable and Fruit Prices Hike in Mumbai: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है. ईंधन महंगा होने के कारण स्थानीय बाजारों में फल और सब्जियों की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आया है. फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के प्रसिद्ध क्रॉफर्ड मार्केट (Crawford Market) के व्यापारियों का कहना है कि परिवहन लागत में वृद्धि और पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के चलते आयात में आ रही रुकावटों ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर दोहरा दबाव बना दिया है. मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94 पैसे महंगा होकर 94.08 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है.
परिवहन लागत बढ़ने से फल-सब्जियां हुईं महंगी
बाजार के विक्रेताओं का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले दिनों में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं. थोक और खुदरा व्यापारियों के मुताबिक, माल ढुलाई महंगी होने के कारण फलों की आपूर्ति में कमी आई है. उदाहरण के तौर पर, जो लीची पहले 250 रुपये किलो बिकनी चाहिए थी, वह अब बाजारों में 350 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है. इसके अलावा अनार और एवोकाडो जैसे फलों के दाम भी काफी बढ़ गए हैं. यह भी पढ़े: Petrol-Diesel Price Hike: आम जनता को फिर लगा महंगाई का झटका, एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें आपके शहर में आज क्या हैं नए रेट
मुंबई में बढ़े फल और सब्जियों के दाम
मुंबई के बाजारों में इस समय आम (Mango) की कीमतों पर भी सीधा असर देखा जा रहा है. आम विक्रेताओं के अनुसार, हालांकि आम वाशी (Vashi) मार्केट से लाए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय परिवहन खर्च बढ़ने से इनकी खुदरा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. आपूर्ति कम होने और दाम बढ़ने के कारण बाजारों से ग्राहक भी गायब हैं, जिससे छोटे दुकानदारों को रोजाना नुकसान उठाना पड़ रहा है.
मार्केट एसोसिएशन को हुआ भारी नुकसान
महात्मा ज्योतिबा फुले मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कराले ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि हवाई मार्ग से होने वाली माल ढुलाई (Freight Charges) की दरें बढ़कर लगभग 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स बेहद महंगा हो गया है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण विमानों का संचालन भी अप्रत्याशित हो गया है. कई उड़ानें रद्द होने से जल्द खराब होने वाले उत्पादों (Perishable Goods) का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
अनिल कराले के मुताबिक, इस युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण इस साल एसोसिएशन को लगभग 1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण भारतीय और विदेशी दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो गया है. लागत में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मुनाफा केवल 10 से 15 प्रतिशत ही रह गया है. इस साल व्यापार केवल लागत निकालने (Break-even) के उद्देश्य से किया जा रहा है. कोंकण क्षेत्र से आने वाले आमों की कीमतें भी इसी वजह से ऊंची बनी हुई हैं.
मध्यम वर्ग और दिहाड़ी मजदूरों पर सबसे बड़ी मार
मुंबई के निवासियों का कहना है कि फल-सब्जियों की आसमान छूती कीमतों ने उन्हें अपनी बुनियादी खपत में कटौती करने पर मजबूर कर दिया है. स्थानीय निवासियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि रसोई चलाना मुश्किल हो रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी उन दिहाड़ी मजदूरों और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों को हो रही है, जो रोज कमाते और रोज खाते हैं.
बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खान-पान की आदतें भी बदल रही हैं. कुछ मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि पहले वे जहां रोजाना दो किलो फल खरीदते थे, अब केवल आधा किलो ही खरीद पा रहे हैं. नागरिकों का कहना है कि वे खाने-पीने की चीजों से पूरी तरह समझौता नहीं कर सकते, क्योंकि सही पोषण न मिलने पर बीमार होने का खतरा रहता है, जिससे चिकित्सा खर्च और बढ़ जाएगा. (इनपुट फ्री प्रेस जर्नल)