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मुंबई की प्रदूषित हवा पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, निर्माण स्थलों की होगी कड़ी निगरानी, बनी 5 सदस्यीय समिति

मुंबई में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि "शहर का प्रदूषण एक दिन में ठीक नहीं हो सकता, लेकिन निर्माण स्थलों से फैलने वाला धूल प्रदूषण नियंत्रण में लाया जा सकता है.

मुंबई की प्रदूषित हवा पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, निर्माण स्थलों की होगी कड़ी निगरानी, बनी 5 सदस्यीय समिति
Representational Image | PTI

मुंबई में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि "शहर का प्रदूषण एक दिन में ठीक नहीं हो सकता, लेकिन निर्माण स्थलों से फैलने वाला धूल प्रदूषण नियंत्रण में लाया जा सकता है. बस जरूरत है नियमों के सही और कड़ाई से पालन की." इसी उद्देश्य से कोर्ट ने निर्माण गतिविधियों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र पांच सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया है.

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकलद की बेंच ने यह समिति बनाई है, जिसमें BMC, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और राज्य सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हैं. यह समिति शहरभर के निर्माण स्थलों पर जाकर जांच करेगी कि क्या प्रदूषण नियंत्रण के नियम सही तरह से लागू हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने BMC और MPCB को 15 दिसंबर तक पिछले एक साल में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया है.

मुंबई में सुधार संभव है: हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना एक लंबी प्रक्रिया है. अदालत ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले 15 वर्षों से संघर्ष जारी है. लेकिन मुंबई की भौगोलिक और हवामान संबंधी स्थितियां बेहतर होने से यहां तेज सुधार की उम्मीद की जा सकती है, बशर्ते कि सभी दिशा-निर्देशों को ईमानदारी से लागू किया जाए.

कोर्ट ने यह भी कहा कि धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण “तुरंत नियंत्रित” किया जा सकता है, और यदि नियमों का पालन ठीक से हो तो 1-2 हफ्तों में जमीन पर असर दिखने लगेगा.

CCTV, सेंसर और वाटर स्प्रिंकलर की व्यवस्था की होगी जांच

अदालत ने BMC से यह स्पष्ट करने को कहा है कि निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए कौन से उपाय किए जा रहे हैं जैसे कि विशेष निगरानी दस्तों की विज़िट, निर्माण स्थलों पर CCTV कैमरे, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर, नियमित पानी का छिड़काव.

सीनियर काउंसल दारियस खंबाटा ने भी अदालत को बताया कि 2024 में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं हो रहा है, जबकि इन्हीं उपायों से धूल प्रदूषण पर सबसे तेज असर पड़ सकता है.

पहले रोकें धूल प्रदूषण, फिर निपटें वाहन प्रदूषण से

कोर्ट ने माना कि वाहन प्रदूषण भी एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन अभी सबसे जरूरी है निर्माण गतिविधियों से उठ रही धूल को काबू में लाना. अदालत ने कहा कि निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन शुरू होते ही मुंबई की वायु गुणवत्ता में तेज सुधार देखा जा सकता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 28, 2025 07:17 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).