Pune Metro Update: पुणेवासियों के लिए खुशखबरी! मेट्रो को पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा

पुणेवासियों के लिए खुशखबरी है. आने वाले दिनों मेट्रो के जरिए पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुँचना और भी आसान हो जाएगा. केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने घोषणा की है कि पुणे मेट्रो के सभी कॉरिडोर को एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा.

(Photo Credits ANI)

Pune Metro Update: पुणेवासियों के लिए खुशखबरी है. आने वाले दिनों मेट्रो के जरिए पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुँचना और भी आसान हो जाएगा. केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने घोषणा की है कि पुणे मेट्रो के सभी कॉरिडोर को एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा. यह घोषणा एयरपोर्ट परिसर में आयोजित एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी (AAC) की बैठक के दौरान की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मंत्री मोहोल ने की.

पीएमसी बनाएगी डीपीआर, महा मेट्रो करेगी निर्माण

मंत्री मोहोल ने बताया कि इस योजना के लिए पुणे महानगरपालिका (PMC) को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्होंने कहा. “महा मेट्रो के महाप्रबंधकों, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों के साथ मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यान्वयन की जिम्मेदारी महा मेट्रो और PMC की होगी, जबकि DPR का निर्माण PMC द्वारा किया जाएगा. यह भी पढ़े: Pune Metro Update: पुणे के नागरिकों के लिए खुशखबर! रात के 11 बजे तक दौड़ेगी मेट्रो, जानें टाईमटेबल

खराड़ी रूट से सीधे एयरपोर्ट कनेक्टिविटी

नया मेट्रो विस्तार खडकवासला–स्वारगेट–हडपसर–खराड़ी मार्ग का हिस्सा होगा, जिससे खराड़ी को सीधे पुणे एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा, मोहोल ने कात्रज से हिंजवाड़ी तक एक अलग मेट्रो कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा है.

हर रूट से एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच

मोहोल ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि खराड़ी हब के सक्रिय होते ही, मौजूदा सभी मेट्रो मार्गों जैसे:

मोहोल ने ने बताया कि एयरपोर्ट तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी. जिससे “पिंपरी-चिंचवड़ और पूरे पुणे जिले के नागरिकों को अब एयरपोर्ट तक सीधी मेट्रो सेवा का लाभ मिलेगा,” – मुरलीधर मोहोल

भविष्य की योजना: पुरंदर हवाई अड्डा

मोहोल ने यह भी बताया कि पुणे जिले की आबादी 1 करोड़ से अधिक हो चुकी है, ऐसे में हवाई अड्डा सुविधाओं की योजना 50 से 100 वर्षों की दीर्घकालिक दृष्टि से बनाई जा रही है.

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