Labour Trafficking Racket Busted: मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर से 53 आदिवासी मजदूरों को किया रेस्क्यू

राजस्थान की प्रतापगढ़ जिला पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले में बंधक बनाए गए 53 आदिवासी मज़दूरों को सफलतापूर्वक छुड़ा लिया है. इन मजदूरों को रोजगार के झूठे वादे करके फंसाया गया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

जयपुर, 27 दिसंबर: राजस्थान (Rajasthan) की प्रतापगढ़ जिला (Pratapgarh District) पुलिस ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के सोलापुर जिले (Solapur District) में बंधक बनाए गए 53 आदिवासी मजदूरों को सफलतापूर्वक छुड़ा लिया है. इन मजदूरों को रोजगार के झूठे वादे करके फंसाया गया था. प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा के मार्गदर्शन में, घंटाली पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर सोहनलाल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने जिले के आदिवासी समुदाय के 53 मजदूरों (13 महिलाएं और 40 पुरुष) को बचाया.

22 दिसंबर को, प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को जानकारी मिली कि घंटाली, पीपलखूंट और परसोला पुलिस स्टेशन इलाकों के वर्दा, जामली, मालिया, गोथरा, उमरिया पाड़ा, बड़ा काली घाटी, थेसला, कुमारी और अन्य गांवों के पुरुषों और महिलाओं को लगभग दो महीने पहले सोलापुर ज़िले (महाराष्ट्र) के अकलुज पुलिस स्टेशन के तहत जाबुद गांव ले जाया गया था. पुलिस ने शनिवार को बताया कि उन्हें एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से रोजगार देने के बहाने फंसाया गया था.  यह भी पढ़ें: Mumbai: हवाई अड्डे पर मानव तस्करी का पर्दाफाश, फर्जी कागजात से महिला को विदेश ले रहा एजेंट हिरासत में

 

बाद में, मजदूरों ने अपने परिवारों से संपर्क किया और बताया कि ब्रोकर सीताराम पाटिल (महाराष्ट्र) और खान (अलवर, राजस्थान) ने एक लोकल साथी के साथ मिलकर करीब 100 मजदूरों को हर दिन प्रति व्यक्ति 500 ​​रुपए और मध्य प्रदेश के इंदौर में मुफ्त खाना और रहने की जगह देने का वादा करके फंसाया था. इसके बजाय, मजदूरों को शोलापुर ज़िले में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भेज दिया गया. ब्रोकर खान ने कथित तौर पर 9.50 लाख रुपये का एडवांस लिया, जबकि सीताराम पाटिल ने जमींदारों से मज़दूरी के तौर पर 18 लाख रुपये लिए और फिर मजदूरों को छोड़ दिया.

जब मजदूरों ने अपनी मज़दूरी मांगी, तो उन्हें पीटा गया, धमकी दी गई, खेतों पर बने घरों और बाड़ों में बंद कर दिया गया और जबरदस्ती काम करवाया गया. कुछ मज़दूर मौका मिलते ही भागने में कामयाब रहे और घर लौट आए. यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने महिला मजदूरों के साथ गलत व्यवहार किया. किसी भी मजदूर को कोई मजदूरी नहीं दी गई. मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए और राजस्थान पुलिस के आदर्श वाक्य — 'जनता में विश्वास, अपराधियों में डर' — का पालन करते हुए, पुलिस अधीक्षक ने तुरंत सब-इंस्पेक्टर सोहनलाल और उनकी टीम को बंधक बनाए गए मज़दूरों के परिवारों के साथ महाराष्ट्र भेजा.

लगातार कोशिश और तालमेल से, पुलिस टीम ने अलग-अलग जगहों से सभी 53 मजदूरों को सफलतापूर्वक बचा लिया, क्योंकि बचाए गए मजदूरों के पास खाने, यात्रा या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की मदद से उनके लौटने की यात्रा और दूसरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया. सभी मजदूरों को सुरक्षित प्रतापगढ़ वापस लाया गया और उन्हें उनके गांवों में छोड़ दिया जाएगा. इस साजिश में शामिल आरोपियों के खिलाफ घंटाली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है, और आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है.

 

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