Kartik Purnima 2020: देश में कार्तिक पूर्णिमा की धूम, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने खारुन नदी में किया स्नान
सीएम भूपेश बघेल ने खारुन नदी में किया कार्तिक पूर्णिमा स्नान (Photo Credits: Twitter)

Kartik Purnima 2020: हिंदू धर्म में कार्तिक मास (Kartik Month) की अमावस्या की तरह ही कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का भी विशेष महत्व बताया जाता है. आज पूरे देश में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे त्रिपुरी पूर्णिमा (Tripuri Purnima) और त्रिपुरारी पूर्णिमा (Tripurari Purnima) भी कहा जाता है. इस पावन तिथि पर गंगा नदी (Ganga River) में स्नान का विशेष महत्व बताया जाता है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में स्नान (Ganga Snan) करने के बाद जप और दान करने से व्यक्ति के समस्त पाप दूर होते हैं और मृत्यु के बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन देश के तमाम तीर्थ स्थलों पर मेले का आयोजन किया जाता है और स्नान-दान करके लोग पुण्य अर्जित करते हैं. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) ने भी नदी में पवित्र स्नान किया.

कार्तिक पूर्णिमा यानी त्रिपुरारी पूर्णिमा के अति पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खारुन नदी में आस्था की डुबकी लगाई. उन्होंने इस नदी में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान किया और दीपदान किया. उन्होंने इसकी तस्वीरें अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करके कैप्शन लिखा है- खारुन नदी में कार्तिक पूर्णिमा स्नान… यह भी पढ़ें: Kartik Purnima 2020: कार्तिक पूर्णिमा का स्नान-दान आज, प्रयागराज और वाराणसी में श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगाई आस्था की डुबकी

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कार्तिक पूर्णिमा स्नान के अलावा सीएम भूपेश बघेल ने मानस महोत्सव में हिस्सा लिया, जहां वे भगवान श्रीराम का भजन गाते दिखे. इस अवसर पर वे मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की भक्ति में सराबोर नजर आए. वहां मौजूद अन्य लोग भी 'बोलो श्री राम, जय राम, जय-जय राम' का जयकारा लगाते दिखे.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पतित पावनी गंगा या फिर किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप दूर होते हैं. इसके साथ ही इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व बताया जाता है. कार्तिक पूर्णिमा स्नान से कई गुना अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात सभी देवता स्वर्ग से धरती पर काशी नगरी में देव दिवाली का पर्व मनाने के लिए आते हैं.