सुप्रीम कोर्ट को आज अपना 52वां मुख्य न्यायाधीश (CJI) मिल गया. जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने इस पद की शपथ ली और शपथ लेते ही सबसे पहले अपनी मां कमलताई गवई के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया. इस भावुक पल ने पूरे देश का ध्यान खींचा.
देश के पहले बौद्ध CJI, दलित समुदाय से दूसरे
जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध और आज़ादी के बाद दलित समुदाय से दूसरे CJI बने हैं. इससे पहले जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने यह सम्मान पाया था. जस्टिस गवई का कार्यकाल करीब छह महीने का रहेगा.
कई बड़े फैसलों का हिस्सा रहे
न्यायमूर्ति गवई सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए कई अहम और ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं. इनमें प्रमुख हैं:
- अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखना
- नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन) को सही ठहराना
- एससी कोटे में उप-वर्गीकरण को मंजूरी देना
- दिल्ली शराब नीति मामले में कविता को जमानत देना
- तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर दो बार की सार्वजनिक आलोचना
- ‘बुलडोजर जस्टिस’ जैसे सख्त रुख वाले फैसले
- इन फैसलों ने उन्हें एक सख्त लेकिन संवेदनशील न्यायाधीश के रूप में पहचान दिलाई.
कहां से शुरू हुआ सफर?
#WATCH | Delhi: CJI BR Gavai greets President Droupadi Murmu, Prime Minister Narendra Modi, Vice President Jagdeep Dhankhar, former President Ram Nath Kovind and other dignitaries at the Rashtrapati Bhavan. He took oath as the 52nd Chief Justice of India.
(Video Source:… pic.twitter.com/yMUL0Sw3LH
— ANI (@ANI) May 14, 2025
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ. उन्होंने 16 मार्च 1985 से वकालत की शुरुआत की. शुरुआती समय में उन्होंने बार के वरिष्ठ वकील और बाद में न्यायाधीश बने एस. भोसले के साथ काम किया.
नागपुर से सुप्रीम कोर्ट तक
1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र वकालत की. बाद में उन्होंने नागपुर बेंच में मुख्य रूप से संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों में विशेषज्ञता हासिल की. वह नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम, अमरावती विश्वविद्यालय और कई स्वायत्त संस्थानों के वकील रहे. जस्टिस गवई का सुप्रीम कोर्ट का सीजेआई बनना ना सिर्फ उनके व्यक्तिगत सफर की उपलब्धि है, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए भी प्रेरणा है, जिसे लंबे समय तक हाशिये पर रखा गया. शपथ लेने के बाद मां के चरणों में झुककर उन्होंने दिखा दिया कि बड़े पद पर पहुंचकर भी जड़ों से जुड़ा रहना कितना जरूरी है.













QuickLY