Flood Satellite Images: अंतरिक्ष से दिखी उत्तराखंड की बाढ़ की तबाही, ISRO की तस्वीरों ने बादल फटने का किया खुलासा
ये तस्वीरें बाढ़ से पहले के हरे-भरे गांव और बाद में मलबे में दबे इलाके का अंतर दिखाती हैं. (Photo Credit : ISRO)

नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धारली और हरसिल गांवों में हाल ही में बादल फटने और बाढ़ से हुई विनाशकारी तबाही का मंजर अब और साफ हो गया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इसके नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें जारी की हैं, जो इस आपदा की भयावहता को बयां कर रही हैं.

तस्वीरों में दिखा 'पहले' और 'बाद' का खौफनाक अंतर

ISRO ने दो तस्वीरों का एक सेट जारी किया है, जो बाढ़ से पहले और बाद के हालात को दिखाता है.

  1. बाढ़ से पहले (13 जून, 2024): इस तस्वीर में धारली गांव, भागीरथी नदी के किनारे बसा हुआ, हरा-भरा और शांत दिख रहा है. नदी अपने सामान्य रास्ते पर बह रही है और सब कुछ व्यवस्थित नजर आ रहा है.
  2. बाढ़ के बाद (07 अगस्त, 2025): दूसरी तस्वीर दिल दहला देने वाली है. यह तस्वीर 5 अगस्त को आई बाढ़ के बाद 7 अगस्त की सुबह ली गई है. इसमें वही इलाका पूरी तरह से मटमैले रंग के मलबे, गाद और पत्थरों से ढका हुआ है. भागीरथी नदी का रास्ता पूरी तरह बदल गया है और उसका पाट कई सौ मीटर चौड़ा हो गया है. जो गांव कभी हरा-भरा था, वह अब मलबे के एक विशाल ढेर के नीचे दबा हुआ दिख रहा है.

सैटेलाइट से मिली मुख्य जानकारियां:

ISRO ने अपने हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट कार्टोसैट-2S (Cartosat-2S) के डेटा का उपयोग करके इस नुकसान का तेजी से विश्लेषण किया. इस विश्लेषण से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • इमारतें डूबीं: कई घर, दुकानें और इमारतें पूरी तरह से मलबे में डूब गई हैं या बह गई हैं.
  • 20 हेक्टेयर में फैला मलबा: अनुमान है कि लगभग 20 हेक्टेयर (करीब 50 एकड़) का विशाल क्षेत्र मलबे की मोटी परत के नीचे दब गया है.
  • नदी का बदला रास्ता: बाढ़ के तेज बहाव ने भागीरथी नदी का मुख्य मार्ग ही बदल दिया है, जिससे भविष्य में भी खतरे की आशंका बढ़ गई है.

कैसे मददगार हैं ये तस्वीरें?

ये सैटेलाइट तस्वीरें सिर्फ तबाही का आकलन करने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये ज़मीन पर बचाव और राहत कार्य में लगी टीमों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही हैं. इन तस्वीरों की मदद से:

  • बचाव दलों को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों की सटीक जानकारी मिल रही है.
  • वे यह समझ पा रहे हैं कि कौन से रास्ते खुले हैं और कौन से मलबे के कारण बंद हो गए हैं.
  • फंसे हुए लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रणनीति बनाना आसान हो गया है.

संक्षेप में, ISRO की यह तकनीक आपदा की इस घड़ी में 'आसमान से आंख' की तरह काम कर रही है, जो जमीन पर मौजूद हमारे बचाव नायकों को रास्ता दिखाकर राहत कार्यों को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद कर रही है.