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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ 'महाभियोग' पर विपक्षी एकता में दरार? कांग्रेस से अलग राह पर टीएमसी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले रुख से दूरी बना ली है. अभिषेक बनर्जी ने 'धैर्य' और 'सभ्य' तरीके से आगे बढ़ने की वकालत करते हुए कांग्रेस की जल्दबाजी पर सवाल उठाए हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ 'महाभियोग' पर विपक्षी एकता में दरार? कांग्रेस से अलग राह पर टीएमसी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Photo/ANI)

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी खेमे में नेतृत्व और रणनीति को लेकर खींचतान तेज हो गई है. कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व में विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (महाभियोग की प्रक्रिया के समान) लाने के फैसले पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने असहमति जताते हुए अलग रास्ता चुना है. टीएमसी ने कांग्रेस के इस कदम को "जल्दबाजी" करार देते हुए एक 'वैकल्पिक और संतुलित' दृष्टिकोण अपनाने का संकेत दिया है, जिसने विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के भीतर दरारों को उजागर कर दिया है. यह भी पढ़ें: West Bengal Budget 2026: ममता बनर्जी का महिलाओं को तोहफा, बजट में ‘लक्ष्मी भंडार’ की राशि बढ़ाई, जानें अब कितने रुपये मिलेंगे

'महाभियोग अंतिम विकल्प होना चाहिए'

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सीधे तौर पर प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ ऐसा कदम उठाने से पहले उन्हें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए.

अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'हमारा रुख सकारात्मक और संतुलित है। हम चाहते हैं कि पहले अध्यक्ष को विपक्षी दलों की शिकायतों के बारे में एक पत्र लिखा जाए और उन्हें जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया जाए. अगर वह कार्रवाई नहीं करते, तब हम एकजुट होकर कदम उठा सकते हैं.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल "शक्ति प्रदर्शन" करने के बजाय लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करना जरूरी है.

नेतृत्व की वर्चस्व जंग?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी का यह कदम केवल प्रक्रियात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक है.

  • वर्चस्व की लड़ाई: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी खुद को दिल्ली में विपक्षी बेंचों पर सबसे बड़े और प्रभावशाली समूह के रूप में स्थापित करना चाहती है.
  • राहुल गांधी बनाम ममता बनर्जी: पार्टी के भीतर यह धारणा है कि कांग्रेस, विशेषकर राहुल गांधी, टीएमसी को वह मान्यता नहीं दे रहे हैं जिसकी वह हकदार है. ममता बनर्जी खुद को शरद पवार और सोनिया गांधी के समकक्ष वरिष्ठ नेता मानती हैं और वह राहुल गांधी के पीछे चलते हुए नहीं दिखना चाहतीं.

बंगाल चुनाव 2026 का असर

टीएमसी का यह स्टैंड पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. बंगाल में टीएमसी अकेले चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है और वह जनता को यह संदेश देना चाहती है कि वह दिल्ली में किसी की 'पिछलग्गू' नहीं है. अनुभवी पत्रकारों का कहना है कि टीएमसी अपनी स्वायत्तता बनाए रखना चाहती है, भले ही वह केंद्र में भाजपा के खिलाफ गठबंधन का हिस्सा हो. यह भी पढ़ें: West Bengal Assembly Election 2026: ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान, पश्चिम बंगाल में TMC अकेले लड़ेगी आगामी विधानसभा चुनाव

विवाद की जड़: जनरल नरवणे की किताब

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने सदन में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की. अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे संसदीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए रोक दिया. इसके बाद कांग्रेस ने अध्यक्ष पर "पक्षपात" का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने का नोटिस दिया, जिस पर अब तक 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन टीएमसी इसमें शामिल नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 11, 2026 06:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).