Palghar MHADA Homes: महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) के कोंकण बोर्ड द्वारा विरार में विकसित घरों की मांग में अचानक बड़ा उछाल देखा गया है. जो घर सालों से बिना बिके खाली पड़े थे, अब उन्हें खरीदने के लिए कतारें लग रही हैं. आंकड़ों के अनुसार, कोंकण बोर्ड औसतन रोजाना 25 घर बेच रहा है. पिछले 152 दिनों के भीतर विरार-बोलिंज क्षेत्र में म्हाडा के 3,750 रेडी-टू-मूव फ्लैट्स की बिक्री हो चुकी है.
पुरानी चुनौतियों का हुआ समाधान
साल 2014 में म्हाडा ने विरार-बोलिंज में किफायती आवास योजना के तहत 9,409 घरों का निर्माण किया था. हालांकि, उस समय इलाके में पानी की भारी किल्लत और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ये घर सालों तक खाली रहे. इससे म्हाडा का करोड़ों रुपया इस प्रोजेक्ट में फंस गया था और रखरखाव का बोझ भी बढ़ रहा था. पिछले साल 'सूर्या जल आपूर्ति परियोजना' का पानी विरार पहुंचने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है. पानी की समस्या हल होते ही खरीदारों का भरोसा लौटा है. यह भी पढ़े: MHADA Lottery 2026: मुंबई में 120 फ्लैट्स की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया टली, नई तारीख का इंतज़ार; जानें देरी की वजह और पूरी डिटेल
बिक्री बढ़ाने के लिए म्हाडा की विशेष पहल
म्हाडा अधिकारियों के मुताबिक, घरों को बेचने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए गए और निजी एजेंसियों की भी मदद ली गई.
- 'पहले आओ-पहले पाओ' नीति: लॉटरी में न बिके घरों के लिए यह नीति अपनाई गई.
- कीमतों में छूट: खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कीमतों में विशेष रियायतें दी गईं.
- वर्तमान स्थिति: कुल 9,409 इकाइयों में से अब तक 7,783 घर बिक चुके हैं. अब केवल 1,626 फ्लैट्स ही बचे हैं.
बेहतर कनेक्टिविटी-इंफ्रास्ट्रक्चर का असर
मुंबई और विरार के बीच चल रहे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स ने इस क्षेत्र की अपील बढ़ा दी है. कोस्टल रोड, बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक, और दहिसर-भायंदर कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट्स विरार को मुंबई के करीब लाएंगे. इसके अलावा, बुलेट ट्रेन कॉरिडोर और विरार-अलीबाग कॉरिडोर से कनेक्टिविटी और भी बेहतर होगी. यात्रा समय में कमी की उम्मीद ने निवेशकों और घर खरीदारों को विरार की ओर आकर्षित किया है.
राजस्व-भविष्य का लक्ष्य
कोंकण बोर्ड का लक्ष्य अगले एक से दो महीनों के भीतर शेष 1,626 घरों को बेचना है. म्हाडा अधिकारियों को उम्मीद है कि इन घरों की बिक्री से करीब 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. इस राशि का उपयोग म्हाडा की अन्य लंबित परियोजनाओं को गति देने के लिए किया जाएगा. म्हाडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका ध्यान केवल आवास उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि एक पूर्ण इकोसिस्टम विकसित करने पर है.













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