Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र में लाडकी बहनों की बढ़ी टेंशन; अपात्रता के चलते 1.05 करोड़ महिलाएं योजना से हो सकती हैं बाहर

महाराष्ट्र सरकार की 'लाडकी बहिन योजना' में बड़ा बदलाव आया है. सख्त सरकारी जांच और ई-केवाईसी (e-KYC) मानदंडों के कारण लगभग 1.05 करोड़ महिलाओं के अपात्र होने की संभावना है. हालांकि, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि पात्र बहनों को योजना का लाभ मिलता रहेगा.

(Photo Credits File)

Ladki Bahin Yojana:  महाराष्ट्र सरकार की 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' को लेकर लाभार्थियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है. योजना के शुरू होने के करीब दो साल बाद, अब बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी है. ताजा सरकारी आंकड़ों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 5 लाख महिलाएं इस योजना से बाहर हो सकती हैं. सरकार अब केवल उन्हीं महिलाओं को लाभ देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो पात्रता के सभी कड़े मानदंडों को पूरा करती हैं.

लाभार्थियों की संख्या में भारी गिरावट की वजह

जब यह योजना शुरू हुई थी, तब लाभार्थियों की कुल संख्या 2 करोड़ 53 लाख थी. हालांकि, अब यह आंकड़ा तेजी से कम होने की राह पर है. इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:  यह भी पढ़े:  Ladki Bahin Yojana E-KYC Update: लाड़की बहनों को ई-केवाईसी सुधार के लिए आखिरी मौका, 31 मार्च तक का समय, नहीं तो रुक सकती है किस्त

  1. ई-केवाईसी (e-KYC) की कमी: जिन महिलाओं ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अपात्र घोषित किया जा रहा है.
  2. आयकर और सरकारी डेटा मिलान: आयकर विभाग के डेटा और पारिवारिक आय के विवरणों के साथ आधार मिलान करने पर बड़ी संख्या में अपात्र आवेदन सामने आए हैं.

क्या हैं योजना के अनिवार्य निकष (Criteria)?

योजना का लाभ जारी रखने के लिए सरकार ने कुछ सख्त नियम तय किए हैं. जो महिलाएं इन मानदंडों में फिट नहीं बैठतीं, उनके अर्ज बाद (Reject) किए जा रहे हैं:

बजट आवंटन और सीएम फडणवीस का पक्ष

लाभार्थियों की संख्या घटने की चर्चाओं के बीच, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बजट सत्र के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने इस योजना के लिए 26,500 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है.

सीएम फडणवीस ने विधानसभा में कहा:

"हमारी सरकार राज्य की पात्र बहनों को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. बजट में आवंटन का कम होना इस बात का संकेत है कि हम योजना को अधिक पारदर्शी और लक्ष्य-आधारित बना रहे हैं. ई-केवाईसी और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद जो महिलाएं पात्र पाई जाएंगी, उन्हें योजना का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा. सरकारी खजाने का पैसा केवल उन्हीं को मिलना चाहिए जो वास्तव में इसके हकदार हैं."

आगे की राह और महिलाओं के लिए सलाह

सूत्रों के अनुसार, 2024 से चल रही लगातार जांच के कारण अब केवल 1.5 करोड़ के आसपास महिलाएं ही शेष रह सकती हैं. प्रशासन ने उन महिलाओं से अपील की है जो वास्तव में पात्र हैं लेकिन उनकी किस्तें रुक गई हैं, कि वे तुरंत अपने स्थानीय केंद्र पर जाकर दस्तावेजों और ई-केवाईसी की स्थिति की जांच करें. भविष्य में लाभार्थी सूची में और भी शुद्धीकरण होने की संभावना जताई जा रही है ताकि अपात्र लोग इसका गलत लाभ न उठा सकें.

 

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